बरेली। कोरोना संकट के चलते लॉकडाउन के बीच मजदूर और रिक्शा चालक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इनके परिवारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। असंगठित क्षेत्र इन मजदूर परिवारों किसी विभाग में पंजीकरण भी नहीं है। इसलिए इन्हें सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता भी नहीं मिल पा रही है। कामकाज छिन जाने की वजह से इन परिवारों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट आ गया है। ऊपर से परिवार में यदि कोई बीमार है तो उसके लिए दवाओं का इंतजाम करना भारी पड़ रहा है।
दो वक्त के खाने के भी लाले
नई बस्ती के पास रहने वाले संजय कुमार बताते हैं कि वह रिक्शा चलाकर परिवार का जैसे-तैसे गुजारा करते हैं, मगर इन दिनों उनका रिक्शा खड़ा है। सड़क पर सवारी नहीं हैं। दो वक्त के भोजन के लाले पड़े हुए हैं। यह पूछने पर कि निगम ने उनका रजिस्ट्रेशन नहीं किया.. संजय का कहना है कि वह किराए पर रिक्शा चलाते हैं। रजिस्ट्रेशन रिक्शा मालिक का होता है। ऐसे में रिक्शा चालकों को सहायता नहीं मिल पा रही है।
दान की पूड़ी नमक से खाने को मजबूर
मढ़ीनाथ के अजय कुमार ने बताया कि काम बंद होने के बाद उनके परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। आज किसी ने उन्हें पूड़ी सब्जी दान में दे दी तो उन्होंने सब्जी और पूड़ी परिवार के अन्य सदस्यों को खिला दी। खाने से दो पूड़ी बची तो नमक लगाकर खा लीं। अजय ने बताया कि इस वक्त परिवार के पास इतना पैसा भी नहीं कि सबके लिए दो वक्त के खाने का इंतजाम हो सके। ऐसे में किसी तरह पेट भरना है।
घर में बेटी बीमार ... क्या करें
लॉकडाउन के बीच दैनिक मजदूरी करने वाले नरेश का हाल भी कुछ ठीक नहीं है। काम पहले ही बंद है और अब उनकी डेढ़ साल की बेटी को निमोनिया हो गया है। जहां घर में दो वक्त के भोजन के लाले हैं, वहीं बेटी के लिए दवाओं का इंतजाम करना भी भारी पड़ रहा है। कहा कि उनके पास अब तक कोई भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी नहीं पहुंचा है जिससे वह अपनी फरियाद कर सकें।
मुश्किल समय है, किसी तरह काट रहे
दैनिक मजदूरी करने वाले कृष्णा बिहारी ने कहा कि यह उनके लिए काफी मुश्किल का दौर है। काम बंद है और दो वक्त की रोजी रोटी भी नसीब नहीं हो पा रही है। वहीं, सरकार जिस मदद की बात कर रही है वह काफी नहीं है। एक हजार रुपये में कोई कैसे पूरे महीने परिवार पाल सकता है, जबकि यह मदद पाने के लिए भी भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
जल्द हालत सुधरें तो संभले स्थिति
एलन क्लब सब्जी मंडी में मजदूरी करने वाले मुरारी लाल ने बताया कि मंडी में भी कोई काम नहीं है। सामान न के बराबर आ रहा है। ऐसे मेें मजदूरों की जरूरत भी पूरी नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि कोेरोना संकट से देश जल्द बाहर आ जाए ताकि हालात सुधरें और उन्हें रोजगार मिल सके और उनका परिवार संकट के इस दौर से बाहर आए।
‘नगर निगम कम्युनिटी किचन का संचालन कर रहा है। यह सेंटर हरुनगला में बनाया गया है। इसके अलावा शहर की विभिन्न मजदूर बस्तियों मेें खाने वितरण किया जा रहा है। फिर भी यदि कोई इस सुविधा से अछूता है तो उसकी पहचान कर उस तक पहुंचा जाएगा और मदद की जाएगी।’
- श्यामलता आनंद, अपर नगर आयुक्त