बरेली। बॉक्सिंग में उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं। इसका कारण संघ के पदाधिकारियों की अनदेखी है। इस क्षेत्र में प्रतिभाएं तो बहुत हैं, लेकिन उन्हें सही प्रशिक्षण नहीं मिल पाता। इसके अभाव में प्रतिभाएं दब जाती हैं। रेलवे के मुक्केबाज गोविंद साहनी ने अमर उजाला से बातचीत में ये बातें कहीं।
मूलरूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले गोविंद दो बार वर्ल्ड चैंपियनशिप खेल चुके हैं। वह राष्ट्रीय चैंपियनशिप भी जीत चुके हैं। बरेली आए खिलाड़ी ने बताया कि पढ़ाई में मन न लगने के कारण उन्होंने बॉक्सिंग में कॅरिअर बनाने का निर्णय लिया था। वर्ष 2009 में रिंग में उतरने के बाद लगातार पदक जीतने पर पहले उन्हें असम राइफल्स में व इसके बाद रेलवे में नौकरी मिल गई।
गोविंद ने बताया कि कि उत्तर प्रदेश में बॉक्सिंग को दूसरे खेलों जितना महत्व नहीं दिया जाता। उन्होंने शहर में हो रही राष्ट्रीय प्रतियोगिता का हवाला देते हुए कहा कि इसमें उत्तर प्रदेश की ओर से खेल रहे ज्यादातर खिलाड़ी लीग मुकाबले में ही हार जा रहे हैं। इससे उनकी तैयारियों का अंदाजा लगाया जा सकता है। दूसरे देशों की खेल नीति भारत से बिल्कुल अलग है। वहां के कोच खिलाड़ियों को लंबे समय बाद होने वाली प्रतियोगिता के लिए तैयार करते हैं। खिलाड़ियों को इसका फायदा भी मिलता है। वहीं, भारत में कुछ ही खिलाड़ियों को इतना समय दिया जाता है। कुछ ऐसा ही स्थिति प्रदेश में भी है।
जीत चुके हैं कई पदक
- कर्नाटक में पुरुष एलीट राष्ट्रीय बाॅक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
- थाइलैंड में ओपन इंटरनेशनल बाॅक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
- वियतनाम में ओपन इंटरनेशनल बाॅक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
- कजाखिस्तान में ओपन इंटरनेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक।
- फिनलैंड, पोलैंड, रूस व भारत में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्तर की बाॅक्सिंग प्रतियोगिताओं में भी पदक हासिल किया है।
संवाद
आंवला। वाल्व जो फट गया था-संवाद