बरेली। जीएसटी प्रणाली लागू हुए करीब सात वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन इसके प्रति जनजागरूकता का अभाव है। लिहाजा, जीएसटी विभाग की ओर से स्कूलाें में जागरूकता अभियान शुरू किया जा रहा है। विद्यार्थियों, शिक्षकों को जीएसटी प्रणाली और उपभोक्ता अधिकार आदि जानकारी दी जाएगी।
बरेली जोन जीएसटी (राज्यकर) एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 ओपी चौबे ने बरेली समेत बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर के जीएसटी सहायक आयुक्त (प्रशासन) को पत्र भेजा है। कहा है कि जीएसटी अधिनियम की व्यवस्था जुलाई 2017 में लागू हुई, लेकिन उपभोक्ताओं में जीएसटी कर देयता को लेकर भ्रम की स्थिति है। कई छोटे व्यापारियों को इस कर प्रणाली के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। लिहाज, बिल, टैक्स इनवाइस, चालान नियमानुसार नहीं जारी हो रहे। जबकि किसी राज्य की आधारभूत संरचना के विकास के लिए राज्यकर का योगदान 60 फीसदी है।
बच्चों को बिल मांगने के लिए करेंगे प्रेरित
स्कूलों में आयोजित होने वाले ट्रेनिंग सेशन के दौरान शिक्षक और विद्यार्थियों को बिल मांगने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए उन्हें प्रेरित किया जाएगा। विद्यार्थियों को घर के अन्य बच्चों और बड़ों को भी खरीद का बिल मांगने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कहा जाएगा। सहायक आयुक्तों को उनके जिले के बीएसए और डीआईओएस से संपर्क स्थापित कर स्कूलों का चयन करने, जीएसटी की प्रत्येक शिक्षक, विद्यार्थी को देने के लिए एक घंटे ट्रेनिंग सेशन के निर्देश दिए हैं।
यह दी जाएगी जानकारी
- समाज और सरकार के लिए टैक्स कलेक्शन की व्यवस्था क्यों शुरू हुई? और उसकी उपयोगिता।
- जीएसटी कर व्यवस्था क्या है? इससे संबंधित संक्षिप्त विवरण। टैक्स इनवाइस या बिल लेने के फायदे।
- निर्माता, ट्रेडर्स, पंजीकृत, अपंजीकृत व्यापारी कौन हैं? और इनका निर्धारण किस-तरह से होता है।
- उपभोक्ता को खरीद के समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? और खरीद का पर्चा कैसा होना चाहिए।
टैक्स इनवाइस के क्या हैं फायदे
- वसूला गया कर सरकार के खाते में पहुंचता है।
- खरीदे गए सामान की गारंटी सुरक्षित रहती है।
- सामान वापसी के समय कोई दिक्कत नहीं होती।
- उपभोक्ता फोरम में शिकायत का आधार पक्का पर्चे पर होता है व अन्य।
अमर उजाला ब्यूरो