अब तक प्रचार किया जा रहा था कि आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के दौरे से दरगाह आला हजरत के नुमाइंदों ने दूरी बनाकर रखी थी, लेकिन अब खुलासा हुआ है कि दरगाह की ओर से उसके प्रमुख नुमाइंदे मौलाना शहाबुद्दीन रजवी समेत दो लोग श्री श्री से वीरसावरकर नगर में आर्ट ऑफ लिविंग के एक कार्यकर्ता के निवास पर भोजन के दौरान मिले थे। इस दौरान श्री श्री से उनकी अयोध्या मुद्दे पर बात भी हुई थी। इस मुलाकात को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था, लेकिन अब मौलाना शहाबुद्दीन की श्री श्री के साथ तस्वीर भी सामने आ गई है।
दरगाह आला हजरत से जुड़े मौलाना शहाबुद्दीन रजवी और उनके साथ मुफ्ती फारूख श्री श्री से मिले। बताया जाता है कि श्री श्री ने मौलाना को पटका भी पहनाया। इसके बाद टेबिल पर दोनों के साथ में खाना भी खाया गया। उनकी यह मुलाकात भले ही परदे के पीछे रही, मगर अगले ही दिन यह चर्चा में आ गयी। इसको लोगों ने इस नजरिए से भी देखा कि जब दरगाह का हर शख्स इस कार्यक्रम से अलग रहा तो मौलाना शहाबुद्दीन, जो दरगाह के खास लोगों में गिने जाते हैं, उनके श्री श्री के मिलने के क्या मायने हो सकते हैं। मौलाना रजवी दरगाह आला हजरत से जुड़े संगठन जमात रजा मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव भी है और इसके मुखिया शहर काजी मौलाना असजद खां कादरी हैं। इसके अलावा मौलाना शहाबुद्दीन एक अन्य संगठन तंजीम उलमा इस्लाम के राष्ट्रीय महासचिव भी हैं।
इस संबंध में जब उनसे बात की गई तो मौलाना शहाबुद्दीन का कहना था कि उनकी मुलाकात श्री श्री से दोपहर के खाने पर हुई थी। इसमें उन्होंने श्री श्री से कहा कि बाबरी मस्जिद का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। कोर्ट का फैसला जो भी होगा, वो हमें मंजूर है। फिर भी शरई हुक्म ये है कि जिस जगह मस्जिद बन जाती है वहां जमीन से लेकर आसमान तक मस्जिद का हिस्सा होता है। इस पर समझौते का कोई सवाल नहीं है। इस दौरान उन्होंने अपनी लिखी कुछ किताबें भी श्री श्री को दीं। इसमें हयात आला हजरत, हयात ताजुश्शरीया, करामात ताजुश्शरीया हैं। उन्होंने यह भी साफ किया है वो तंजीम उलमा इस्लाम के राष्ट्रीय महासचिव की हैसियत से मिलने गए थे। इधर जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं शहर काजी मौलाना असजद रजा खां कादरी ने इस मामले से पल्ला झाड़ लिया और कहा कि मौलाना शहाबुद्दीन की श्री श्री से मुलाकात का जमात से कोई वास्ता नहीं। न ही यह बात उनकी जानकारी में थी। ये मौलाना का निजी फैसला हो सकता है। वैसे वो तंजीम उलमा इस्लाम संगठन के पदाधिकारी भी हैं, उस नाते से गए हों, तो नहीं कह सकता।