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Bareilly News: मच्छरों पर बेअसर डीडीटी का छिड़काव थमा, नई दवा की आपूर्ति का इंतजार

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बरेली। मलेरिया, डेंगू से निजात की योजनाओं पर कहीं मच्छरों की प्रतिरोधक क्षमता तो कहीं मिट्टी के तेल की कमी भारी पड़ रही है। अफसरों का दावा है कि अब विकसित की गइॡई दवा से मच्छरों पर भरपूर वार होगा। हालांकि, माहभर बाद भी दवा की आपूर्ति नहीं होने की वजह से इस पर अमल नहीं हो सका है। दूसरी ओर मलेरिया के मरीजों का आंकड़ा 77 जा पहुंचा है।
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साल दर साल बरेली, प्रदेश के मलेरिया और डेंगू प्रभावित जिलों की संवेदनशील सूची में दर्ज हो रहा है। मरीजों का आंकड़ा भी बीते साल बढ़ा था। शासन स्तर पर और एंबेड संस्था के सर्वे में पता चला था कि डाईक्लोरो डाईफेनिल ट्राईक्लोरोइथेन (डीडीटी) का वार मच्छरों पर बेअसर है। लिहाजा बीते साल पायरेथ्रम के छिड़काव की योजना बनी पर मिट्टी का तेल न होने से छिड़काव नहीं हो सका। अब नए सिंथेटिक अल्फा साइपर मेथ्रीन के प्रयोग की तैयारी है।

जिला मलेरिया अधिकारी सत्येंद्र सिंह का कहना है कि संबंधित दवा के छिड़काव के लिए एक अलग तरह की मशीन का प्रयोग होता है। दवा और यह उपकरण अभी मिल नहीं सके हैं। जबकि, बीते माह ही इसके संचालन का प्रशिक्षण हो चुका है।
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नई दवा के प्रति मच्छरों में अभी विकसित नहीं हुई है प्रतिरोधक क्षमता

जिला मलेरिया अधिकारी के मुताबिक मच्छरों के लिए यह दवा बिल्कुल नई है। इसके प्रति कोई प्रतिरोधी क्षमता भी विकसित नहीं हैं। लिहाजा इसके प्रयोग से मच्छरों की तादाद में कमी आना तय है। बताया कि डीडीटी काफी असरकारक थी पर अब यह बेअसर साबित हो रहा। मिट्टी के तेल का प्रयोग देशभर में बंद है। इसलिए पायरेथ्रम का प्रयोग नहीं हो सका। जिला मलेरिया अधिकारी के मुताबिक अल्फा साइपर मेथ्रीन पाउडर है। इसका छिड़काव उन्हीं गांव में कराया जाएगा जो संवेदनशील और अति संवेदनशील हैं। फिलहाल, शहर में या उन गांवों में इसका छिड़काव नहीं किया जाएगा, जहां पिछले वर्ष मलेरिया के आंकड़े कम थे। बीते साल साल पांच ब्लॉकों के 42 गांव अतिसंवेदनशील रहे। इन्हीं से शुरुआत होगी, ताकि रोग का प्रसार थमे और दवा की उपयोगिता साबित हो सके।
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