श्री झूले लाल जयंती शहर में धूमधाम से मनाई गई। सिंधी समाज के लोगों ने न सिर्फ अपने धरों पर ‘जय झूले लाल लिखा’ केसरिया ध्वज फहराया, बल्कि नए साल की भी एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। इस दौरान झूले लाल की शोभायात्रा भी निकाली गई।
श्री झूले लाल ट्रस्ट की ओर से यह शोभायात्रा सिंधु नगर से निकाली गई। अलवर की शहनाई और बैंड बाजों की धुन पर इसमें शामिल सिंधी समाज के लोग नृत्य करते चल रहे थे। इसमें सबसे आगे श्रीगणेश जी की झांकी थी। इसके पीछे क्रमवार माता दुर्गा देवी, भगवान शिव शंकर, हनुमान जी की झांकी थी। अंत में भगवान संत कंवर राम और झूले लाल जी की झांकी थी। इसमें प्रदीप लेखवानी भगवान संत कंवर राम और हरीश खान चंदानी श्री झूले लाल के स्वरूप बने।
शोभायात्रा शहामतगंज, गंगापुर, ईंट पजो का चौराहा, प्रेम नगर, राम जानकी मंदिर, राजेंद्र नगर, बांके बिहारी मंदिर, एकता नगर होती हुई डेलापीर स्थित झूले लाल द्वार पहुंचकर संपन्न हुई। इस बीच रास्ते में ईसाई समाज, वैश्य समाज, पंजाबी समाज सहित कई राजनीतिक, व्यापारिक और सामाजिक संगठनों ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। संचालन में प्रकाश आयलानी, ठाकुर दास निहलानी, डा. गोविंद राम भारवानी, महेंद्र टिकयानी, अशोक मूरजानी, प्रमोद कारयानी, धर्मेश मूरजानी, प्रदीप राजानी, लेखराज मोटवानी हेम दास संतवानी, ज्योति, कविशा, हिना, जूही, सुनीता, पायल, रेखा, तान्या आदि का सहयोग रहा।
घर-घर बजी शहनाई
बरेली। शोभायात्रा से पहले सिंधु नगर स्थित श्री झूले लाल मंदिर में हवन और ध्वजारोहण किया गया। पंडित प्रेम प्रकाश शर्मा ने यज्ञ किया। इसके बाद महिलाओं ने सिंधु नगर में कलश यात्रा निकाली। इसमें बहिराणा साहिब रखी गई। इसी साथ पूरा वातावरण आयो लाल झूले लाल... के घोष से गूंज उठा। महिलाओं ने सिंधी नृत्य छेजि किया और भजन भी गाए गए। खुशी के प्रतीक के तौर पर अलवर से आए शहनाई वादकों ने घर-घर जाकर शहनाई बजाई। बाद में भंडारा हुआ।