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शासन में पहुंचा सपा भाजपा पार्षदों का झगड़ा

Fri, 01 Apr 2016 01:15 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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डीएम से ‌म‌िले लोग
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नगर निगम बोर्ड में सपा और भाजपा पार्षदों के बीच अभद्रता का मामला शासन में पहुंच गया है। भाजपा पार्षदों के तहरीर देने और मेडिकल कराने के बाद सपा पार्षदों ने कमिश्नर की अनुपस्थिति में डीएम को ज्ञापन देकर भाजपा के पांच पार्षदों की सदस्यता रद करने की मांग की। वहीं, भाजपा विधायक डा. अरुण कुमार ने पुलिस को दो दिन में झगड़े के दोषी पार्षदों की वीडियो फुटेज से पहचान कर एफआईआर दर्ज न करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। 
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बुधवार को नगर निगम बोर्ड की सामान्य बैठक में भाजपा और सपा के पार्षदों के बीच कस्तूरबा स्कूल की बिल्डिंग हस्तांतरण प्रस्ताव बहुमत के बल पर मंजूर करने पर धक्का मुक्की और हाथापाई हो गई थी। इसके बाद भाजपा की महिला पार्षदों ने सपा के पांच पार्षदों राजेश अग्रवाल, आरिफ कुरैशी, मो. नासिर, अकील गुड्डू और मोहम्मद शमीम पर अभद्रता और छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए कोतवाली पुलिस को एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी थी। सपा पार्षदों ने भी जवाब में भाजपा के पांच पार्षदों विकास शर्मा, छंगामल मौर्य, कपिलकांत, शालिनी जौहरी और चित्रा मिश्रा के खिलाफ पुलिस को तहरीर देकर मेडिकल कराया था। बृहस्पतिवार को सपा के पार्षदों की मिशन कंपाउंड में मीटिंग की गई। इसमें सबकी सहमति बनने के बाद पार्षद दल नेता राजेश अग्रवाल ने कमिश्नर की अनुपस्थिति में जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर भाजपा के पांचों पार्षदों पर अभद्रता और झगड़े का आरोप लगाकर इनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की। उधर, भाजपा विधायक डा. अरुण कुमार ने कहा कि पार्टी ने पुलिस को दो दिन में वीडियो फुटेज की जांच कर दोषी सपा पार्षदों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की। 

‘नगर निगम बोर्ड में जो कुछ भी घटना हुई, वह कैमरे में रिकार्ड है। उसमें दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। ऐसा न हो कि शिकायत करने वाले सपा पार्षदों को जांच के बाद अपनी सदस्यता बचानी मुश्किल पड़ जाए। ’ विकास शर्मा, नेता भाजपा पार्षद दल
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असरदार लोगों के दबाव में मुकदमे लिखने और न लिखने के लिए चर्चा में रही कोतवाली पुलिस ने नगर निगम बोर्ड की बैठक में हुई हाथापाई के बारे में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की। आरोप सिर्फ धक्कामुक्की का ही नहीं बल्कि महिला पार्षदों से अभद्रता का भी है। कहा जा रहा कि इस बारे में अभी विधिक राय ली जा रही है। इससे पहले कहा गया था कि मेयर लिख कर देंगे तभी रिपोर्ट लिखी जा रही है। भाजपा की महिला पार्षदों का कहना है कि कोतवाली पुलिस समाजवादी पार्टी के गुलाम की तरह काम कर रही है।  
बुधवार को भाजपा पार्षद शालिनी जौहरी, अनुपम चमन, ऊषा सैनी और चित्रा मिश्रा आदि ने कोतवाली में तहरीर दी थी कि समाजवादी पार्टी के पार्षदों ने कस्तूरबा नगर निगम इंटर कॉलेज की जमीन को लेकर हुए प्रस्ताव के दौरान उनके साथ बदसलूकी की है। इस दौरान उनके साथ हाथपाई भी हुई है। मेयर पूरी तरह अपने पार्षदों के चुंगल में हैं। वह मेयर न होकर सपा अध्यक्ष के रूप में बोर्ड की बैठक का संचालन करते हैं। 
उधर, शाम को सपा के पार्षद भी कोतवाली पहुंचकर भाजपा पार्षदों पर बदसलूकी का आरोप लगाते हुए तहरीर दे दी थी। सपा पार्षद दल के नेता राजेश अग्रवाल ने तहरीर में कहा है कि भाजपा के पार्षद टैक्स में छूट और कस्तूरबा स्कूल बिल्डिंग के प्रस्ताव स्वीकृत होने पर सदन में अभद्रता करने लगे। मेरे ऊपर हमला किया गया जिसमें मेरी पैंट फट गई। 

वीडियो फुटेज बताएगी कौन है गुनहगार 
बरेली। नगर निगम बोर्ड की बैठक में सपा और भाजपा पार्षदों के हंगामे, गाली गलौज और हाथापाई की जांच करने के लिए आवास विकास चौकी इंचार्ज प्रीति पवार वीडियो फुटेज ले गईं। अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति कुमार सिंह ने पुलिस को वीडियो फुटेज उपलब्ध कराई। 
बुधवार को नगर निगम की बैठक में भाजपा पार्षद कपिल कांत के ‘बदबू’ शब्द से उठे विवाद के बाद सपा और भाजपा पार्षदों के बीच हंगामा, गाली गलौज और हाथापाई सदन में लगे वीडियो कैमरे में रिकार्ड हो गई थी। मेयर डा. आईएस तोमर ने वीडियो फुटेज निकलवाकर जांच की बात कही थी।

-पुलिस के लिए कोई ऐसा नियम नहीं है कि बोर्ड में मारपीट और अन्य कोई घटना हो जाए तो मुकदमा लिखने के लिए मेयर की अनुमति लेना जरूरी है। सदन में असलहा लेकर कोई चला आता है या तो उसे पकड़ने के लिए मेयर ही अनुमति देंगे क्या ?-घनश्याम शर्मा, अध्यक्ष, बरेली बार एसोसिएशन

-सदन के अंदर का मामला है। इसलिए पुलिस इसमें बिना मेयर के घटना की पुष्टि किए ऐसे मामलों कोई कार्रवाई नहीं कर सकते हैं। मेयर कहें तो हम मुकदमा लिखकर कार्रवाई शुरू कर देंगे- समीर सौरभ, एसपी सिटी

सदन में अनुशासन मेयर की जिम्मेदारी 
शहर विधायक डा. अरुण कुमार ने कहा कि नगर निगम बोर्ड में सपा पार्षदों ने जिस तरह महिला पार्षदों से अभद्रता की और हाथापाई पर उतर आए वह निंदनीय है। महापौर सदन की अध्यक्षता कर रहे थे। उनको अपने पार्षदों को रोकना चाहिए था। कैंट विधायक राजेश अग्रवाल ने कहा कि सदन छोटा हो या बड़ा। अध्यक्ष की ही जिम्मेदारी होती है कि वह उसे गरिमापूर्ण तरीके से चलाये। सपा के बड़े नेताओं का रिफ्लेक्शन छोटे स्तर पर दिखा। ये दुर्भाग्यपूर्ण है। पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन ने कहा कि सपा के मेयर हैं और पार्षद भी उनकी पार्टी के ही थे। वह चाहते तो समझा बुझाकर ये घटना रोकी जा सकती थी। सुप्रिया ऐरन के मुताबिक जब वह मेयर थीं तो उन्होंने सब पार्षदों से कह दिया था कि अगर वह अनावश्यक शोरगुल या हंगामा करते हैं तो वह सदन नहीं चलायेंगी। इसी का नतीजा ये निकला कि उनके कार्यकाल में पार्षदों ने अनुशासन बनाये रखा। पूर्व मेयर सुभाष पटेल का कहना था कि जिस प्रस्ताव पर ये घटना हुई, उस पर विधिक राय लेने के बाद ही प्रस्ताव सदन में रखना चाहिए था। छह अप्रैल को ये मामला आल इंडिया मेयर कौंसिल की बैठक में उठायेेंगे। 
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