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Bareilly News: टीकाकरण...कहीं सोच बदली, कहीं जागरूकता कमी से विरोध बरकरार

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बरेली। नियमित टीकाकरण बच्चों को 12 जानलेवा बीमारियों के प्रति सुरक्षा कवच प्रदान करता है। बावजूद इसके जिले में सैकड़ों परिवार जागरूकता की कमी के कारण बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं कर रहे। तमाम प्रयासों के बाद कहीं सोच बदली है तो कहीं अभी विरोध बरकरार है। स्वास्थ्य विभाग अब ऐसे विरोधी परिवारों को ''''टीका है सुरक्षा कवच, परिवार रोगों का करें प्रतिरोध'''' अभियान के तहत जागरूक करेगा।
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जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन के मुताबिक करीब दो साल पहले तक जिले में लगभग चार हजार परिवार विरोध में थे। तमाम जागरूकता अभियानों और कार्यक्रमों के जरिये समझाने पर दो हजार परिवार राजी हुए। शेष दो हजार को समझाने के लिए जनप्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं का सहयोग लिया गया। इनमें करीब 14 सौ परिवारों ने बच्चों को टीका लगवाया। सोच में बदलाव के प्रयास जारी हैं और लोगों में जागरूकता भी आ रही है, लेकिन अभी कई परिवार विरोध में हैं। ऐसे परिवारों को ही टीके का महत्व बताने के लिए टीका है ''''सुरक्षा कवच, परिवार रोगों का करें प्रतिरोध'''' अभियान के तहत समझाया जाएगा।

बहेड़ी के 83, भमोरा के 78, आंवला के तीन, सीबी गंज के 12, नदौसी के 23, स्वालेनगर के छह, जाटवपुरा के आठ, मौलानगर के सात परिवार टीकाकरण के विरोध में थे। स्वास्थ्यकर्मियों और स्थानीय नागरिकों की ओर से टीके की जरूरत और सुरक्षा कवच की जानकारी देने पर ये परिवार बच्चों को नियमित टीकाकरण के जरिये रोगों से बचाव संबंधी वैक्सीन लगवाने लगे हैं।
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बाकरगंज में 87, बिथरी चैनपुर में 74, मझगवां में 54, शेरगढ़ में 52, फरीदपुर में 50, क्यारा में 32, पुराना शहर में 28, बानखाना में 27, सिविल लाइंस में 22, मुड़िया नवी बक्श में 21, पीर बहोड़ा में 18, दलेलनगर में 16, गंगापुर में 12, जगतपुर और नवाबगंज में 11 परिवार टीके के विरोध में हैं। इसके अलावा रामनगर, भोजीपुरा, कुआंडांडा, फतेहगंज पश्चिमी, मीरगंज, फरीदपुर, बहेड़ी, इज्जतनगर, हरुनगला, सुभाष नगर, घेर जाफर खां, मढीनाथ, हजियापुर में दस से कम परिवार विरोध में हैं।

बीते दिनों जयपुर में अमर उजाला फाउंडेशन और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में सेमिनार आयोजित हुआ था। नियमित टीकाकरण के लाभ व विरोधी परिवारों को राजी करने पर विशेषज्ञों ने मंथन किया था। जागरूकता के लिए सकारात्मक संदेश वाले वीडियो, टैगलाइन और पहले विरोध के बाद राजी हुए परिवारों के हवाले से लोगों को प्रेरित करने समेत अन्य विकल्पों पर सुझाव दिए गए थे।
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