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Bareilly News: किसी की आंखें कमजोर तो किसी को मोतियाबिंद, दौड़ा रहे रोडवेज बसें

Sat, 23 Dec 2023 02:14 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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बरेली। रोडवेज के कई चालक कमजोर आंखों के सहारे यात्रियों को सफर करा रहे हैं। यातायात पखवाड़े के दौरान परिवहन विभाग की ओर से लगवाए जाने वाले नेत्र परीक्षण शिविरों में यह स्थिति सामने आई है। रीजन के चारों डिपो में 75 ऐसे चालक हैं, जिनकी आंखें कमजोर हैं या वे मोतियाबिंद से पीड़ित हैं। कई को चश्मा बदलवाने की जरूरत है, लेकिन वह पुराने चश्मे से ही काम चला रहे हैं।
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सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान चारों डिपो के 235 चालकों का नेत्र परीक्षण कराया गया। इस दौरान चालकों में निकट और दूर दृष्टि दोष के साथ मोतियाबिंद की शिकायत पाई गई। रोडवेज के पास चालक-परिचालकों की पहले से कमी है। चारों डिपो में 641 बसें हैं। नियमानुसार प्रति बस पर चालक की तैनाती का औसत 2.16 होना चाहिए। इस तरह चारों डिपो में 1,384 चालकों होने चाहिए, लेकिन करीब 400 चालक कम हैं। 50 से ज्यादा चालक नियमित ड्यूटी नहीं करते।
चालकों की कमी के कारण काफी बसें वर्कशॉप से ही नहीं निकल पातीं। लंबी दूरी की जिन बसों पर दो चालकों को भेजा जाना चाहिए उन पर भी एक को ही भेजा जा रहा है। अधिकारी बुजुर्ग चालकों की ड्यूटी भी लगा देते हैं। रीजन के करीब 25 फीसदी चालकों की औसत उम्र 55 वर्ष या इससे ज्यादा है। नेत्र संबंधी सबसे ज्यादा समस्या इसी उम्र के चालकों में पाई गई है।
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परिचालकों की भी है कमी
चारों डिपो में परिचालकों की भी कमी है। बरेली डिपो में 85, रुहेलखंड डिपो में 66, बदायूं डिपो में 78 और पीलीभीत डिपो में 46 परिचालकों की कमी है। इस वजह से भी कई बार रोडवेज सेवाएं प्रभावित होती हैं। हालांकि, इन दिनों यात्रियों की संख्या कम हो गई है। रात्रिकालीन सेवाओं पर भी प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं।
2006 के बाद नियमित भर्ती नहीं, 85 फीसदी चालक संविदा के
रोडवेज में वर्ष 2006 के बाद नियमित चालकों की भर्ती नहीं हुई है। बसों को दौड़ा रहे चालकों में से करीब 85 फीसदी संविदा के हैं। चारों डिपो के पास ए ग्रेड चालकों की कमी है। इसी कारण पिछले दिनों बरेली और रुहेलखंड डिपो के एआरएम ने बीएस-6 मॉडल की नई बसों को लेने से ही इन्कार कर दिया था। अनुभवहीन चालकों के कारण बदायूं डिपो की बीएस-6 मॉडल की दो बसें दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी हैं। चालकों की समय-समय पर नेत्र जांच भी नहीं कराई जाती।
वर्जन
सड़क सुरक्षा पखवाड़े के तहत चारों डिपो में चालकों के नेत्रों की जांच कराई गई है। निजी वाहनों के चालकों की आंखों की भी जांच कराई गई है। काफी संख्या में चालकों में दृष्टि दोष पाया गया है। इसमें काफी संख्या में रोडवेज के चालक भी शामिल हैं। - दिनेश कुमार, आरटीओ प्रवर्तन
समय-समय पर चालकों की आंखों जांच कराई जाती है। परिवहन विभाग भी नेत्र जांच करा रहा है। कुछ चालकों में दृष्टि दोष पाया गया है। उनको चश्मा बनवाने की सलाह दी गई है। चालकों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। ट्रेनिंग सेंटर को अपग्रेड किया जा रहा है। - धनजी राम, सेवा प्रबंधक बरेली परिक्षेत्र
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