शहर को बहुत जल्दी ही सौर ऊर्जा पर आधारित स्ट्रीट लाइट का तोहफा मिलने वाला है। बिजली हो या न हो लेकिन सौर ऊर्जा से स्ट्रीट लाइट की एलईडी रात के समय जलती रहेगी। ऐसी ही व्यवस्था पीने के पानी के लिए कुछ नलकूपों के लिए होगी। इससे पहले ट्रायल बतौर गांधी उद्यान में अगले महीने 60 एलईडी लाइटों के लिए सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित कराने की कवायद नगर निगम ने शुरू कर दी है। इस प्लांट से गांधी उद्यान में बिजली न होने की स्थिति में रोशनी की व्यवस्था की जाएगी। जिससे कि वहां पर अंधेरा न हो और टहलने वाले लोगों के लिए निरंतर रोशनी बनी रहे।
ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर लालटेन उपलब्ध कराने के साथ-साथ अब शहरी क्षेत्रों में भी सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने को प्लांट स्थापित किए जाने है। इनके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार 80 फीसदी विशेष अनुदान प्रदान करेंगी। शेष 20 फीसदी धनराशि स्थानीय निकायों को अपने संसाधनों से जुटानी होगी। नेडा को नोडल एजेंसी नामित किया है जो कि समय-समय पर तकनीकी जानकारी मुहैया कराती रहेगी।
नेडा के अधिकारियों का कहना है कि सौर ऊर्जा पर आधारित प्लांट से बिजली इस्तेमाल करने से खर्चा कम होगा और प्रदूषण से राहत मिलेगी। एक बार में स्थापित सौर ऊर्जा प्लांट की प्लेट करीब 40 से 50 साल तक काम करती है। पांच साल बाद बैट्री बदलने की जरूरत होती है।
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‘पहले फेज में ट्रायल बतौर गांधी उद्यान में सौर ऊर्जा प्लांट जल्दी लगेगा। उसकी सफलता के बाद ही नगर निगम स्ट्रीट लाइट और नलकूपों को भी सौर ऊर्जा से संचालित करने के बारे में फैसला करेगी। हालांकि टेंडर प्रक्रिया आदि के बारे में प्रदेश सरकार की ओर से नियमावली जारी कर दी गई है।’ शीलधर यादव, नगर आयुक्त