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Bareilly News: अधूरे सर्वे में ही खोल दिया सॉफ्टवेयर, जारी कर दिए गृहकर के बिल

Thu, 01 Aug 2024 06:14 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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बरेली। शहरवासियों के गृहकर बिलों में गड़बड़ी या बिल जारी न होने का मुख्य कारण जीआईएस सर्वे ठीक से न होना है। अभी तक हुए सर्वे में 40 से 50 प्रतिशत मकानों के आगे नो मैच लिखा हुआ है। इसके बावजूद अधिकारियों ने जल्दबाजी में जीआईएस सर्वे को लागू कर दिया। इस वजह से नो मैच वाले मकानों के बिल ही नहीं बने और इन मकानों का टैक्स आसपास की संपत्तियों में जुड़ गया। इससे कई गलत बिल बन गए। यही कारण है अब बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। अब विभाग उन्हें दुरुस्त नहीं कर पा रहा और लोग भटक रहे हैं।
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नगर निगम के अधिकारी इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे। वहीं, नगर निगम की आय भी घट रही है। निगम की कार्यकारिणी बैठक में इस बार गृहकर से 59 करोड़ की आमदनी का प्रस्तावित लक्ष्य पूरा होना मुश्किल बताया जा रहा है। पार्षदों के अनुसार करदाताओं का सर्वे ठीक से न किए जाने के कारण दिक्कतें सामने आ रही हैं।
ऐसे तो पांच साल में भी नहीं सुधरेंगे हालात

गृहकर बिल बनवाने या फिर उसकी गड़बड़ी दूर कराने के लिए निगम के पुराने टैक्स विभाग में सात विंडो लगाई गई हैं, लेकिन निगम के पास संसाधनों की कमी है। इससे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। निगम ने तीन कंप्यूटर मंगवा लिए हैं और दो से तीन दिन में तीन और कंप्यूटर टैक्स विभाग में पहुंच जाएंगे। स्टाफ भी कम है। ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में स्वयंकर निर्धारण के फाॅर्म एकत्र हो गए हैं। इन फाॅर्मों को फीड करने के बाद नए बिलों को जारी करना चुनौती है। पार्षद राजेश अग्रवाल का कहना है कि जिस गति से काम हो रहा, उससे तो संशोधित बिल बनने में पांच साल तक का समय लग जाएगा। वहीं, नगर निगम ने तीन महीने में बिल जमा करने पर टैक्स में छूट की सुविधा दी है।
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केस...1
बड़ा बाजार में स्थित कैलाशो देवी के नाम से एक दुकान का बिल इस बार 26,658 हजार रुपये आया है। यह पहले के बिल से 80 फीसदी ज्यादा है। जीआईएस सर्वे में दुकानों के फोटो भी अलग दिखा दिए हैं। दुकान का बिल पहले 1300 रुपये का आता था, अब बिल जमा करने के लिए दुकान मालिक नगर निगम के चक्कर लगा रहा है।
केस...2
पुराने शहर के आसिफ के मुताबिक आवासीय बिल पहले 519 रुपये आता था। दादा इलाही का मकान है और सालों से कोई नया कमरा भी नहीं बना है। अबकी बार बिल 76 हजार रुपये का दे दिया है। नगर निगम के चक्कर काटकर परेशान हो गए हैं, लेकिन अभी तक बिल ठीक नहीं हुआ है।


कोट
सर्वे अधूरा होने के कारण ही गृहकर के बिल गायब हैं या फिर जारी ही नहीं हुए हैं। करीब पचास फीसदी भवनों की आईडी सर्वे में मैच नहीं हो रही। इसीलिए लोग भटक रहे हैं। नगर निगम अधिकारियों को सर्वे पूरा करवाकर ठीक से बिल जारी करना चाहिए। - राजेश अग्रवाल, पार्षद
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वर्जन...

तीन कंप्यूटर आ गए हैं और बाकी दो से तीन दिन में आ जाएंगे। उपभोक्ताओं के लिए एसी भी दो से तीन दिन में लग जाएगा। स्टाफ की कमी की कोई बात सामने नहीं आई है, इसको दिखवाया जाएगा। - निधि गुप्ता वत्स, नगर आयुक्त
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ऐसे कर सकते हैं निराकरण
- अधिक बिल आने पर नगर निगम की वेबसाइट पर जाकर अपने मकान के आगे की रोड की चौड़ाई व मकान के क्षेत्रफल को वर्ग मीटर में देख लें। अगर उसमें मकान या अन्य भवन का वर्ग मीटर गलत आ रहा है तो आपत्ति के साथ सही वर्ग मीटर लिखकर दें और पुराने बिल के मुताबिक गृहकर को जमा कर दें। यहां ऑनलाइन आपत्ति भी दर्ज हो सकती है।
- जिन लोगों के भवन में दूसरे भवनों का फोटो आ रहा है, वह सॉफ्टवेयर से बिल निकालें और सही लोकेशन फोटो को अटैच कर आपत्ति फार्म के साथ दे दें। इसके लिए नगर निगम में अलग से विंडो भी बनाई गई है। किसी भी जोन का व्यक्ति वहां फार्म जमा कर बिल जमा कर सकता है, जिसको बाद में अपडेट कर दिया जाएगा।

- अधिकतर बिलों की आईडी का मिलान नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह से लोगों को दिक्कत हो रही है। इसके लिए वेबसाइट पर हेल्पलाइन नंबर दे रखे हैं। इसके लिए जोन एक व दो के गंगाधर मिश्रा को 7498186599, जोन तीन के प्रविंद शुक्ला को 8299236118 और जोन चार के उपभोक्ता सन्नू कुमार सिंह को 7254845792 पर शिकायत ब्योरे के साथ व्हाट्सएप कर दें। उनका भी समाधान जल्द होने की बात कही जा रही है।

वर्जन...

समस्याओं का निदान आसान है, इसको लेकर नोटिस भी लगा दिया गया है। जिनकी आईडी का मिलान नहीं हो रहा है, उनके लिए भी हेल्पलाइन नंबर जारी किए जा चुके है। वहीं बड़े बिलो को ठीक कराने के लिए ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों सुविधाएं मौजूद हैं। - प्रदीप कुमार, मुख्य कर अधीक्षक
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