बरेली। पुलिस और अनाथालय जैसी संस्थाओं में समन्वय न होने की वजह से बारादरी की लापता बच्ची सोफिया नौ दिन बाद अपने परिवार से मिल सकी थी।
सुभाष नगर के करेली गांव निवासी मजदूर कल्लू की पत्नी अपने मायके में जगतपुर के आकाश टावर के पास रहने आई थीं। तीन जून को वह अपनी मां और पांच साल की बेटी सोफिया के साथ जिला अस्पताल गई थीं। वहीं से सोफिया लापता हो गई। परिवार ने पुलिस को बच्ची के जगतपुर नानी के घर से लापता होने की सूचना देकर बारादरी थाने में पांच जून को गुमशुदगी दर्ज करा ली। बारादरी पुलिस उसकी ननिहाल के आसपास के सीसीटीवी कैमरे तलाशती रही पर बच्ची नहीं मिली। गुमशुदगी को अपहरण में बदलकर दरोगा नसीम खां ने बच्ची को खोजने में खासी मशक्कत की। बाद में 11 जून को बच्ची कोतवाली क्षेत्र के आर्य समाज अनाथालय में मिल गई। पुलिस की मौजूदगी में अनाथालय के प्रधान हर्षवर्धन ने बच्ची उसके नाना शौकत को सौंप दी।
खुलासा हुआ कि बच्ची तीन जून को ही लावारिस भटकती हुई एक टेंपो ड्राइवर को मिली। उसने उसी दिन बच्ची को प्रेमनगर थाना पुलिस को सौंप दिया था और पुलिस ने चाइल्ड लाइन के जरिये बच्ची को अनाथालय भिजवा दिया। मुस्लिम समुदाय की बच्ची यहां आराम से रही पर सवाल उठा था कि अगर अगल-बगल के थानों की पुलिस, चाइल्ड लाइन और अनाथालय का आपसी समन्वय ठीक होता तो बच्ची उसी दिन या अगले दिन मिल जाती।