अगर निजी पैथालॉजी सेंटर से डेंगू की जांच कराई है तो उसे देखकर घबराइये मत.. ये रिपोर्ट गड़बड़ हो सकती है। मतलब आपको डेेंगू न होने पर भी डेंगू का खौफ दिखाकर डराया जा सकता है। यह हम नहीं बल्कि पैथालॉजी सेंटर से प्राप्त रिपोर्ट ही कह रही हैं। जिला अस्पताल के डॉक्टरों को ऐसी गलत रिपोर्ट मिली तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने मरीजों को दूसरी जांच कराने की सलाह दी। दूसरी जांच में मात्र एक दिन का फर्क था लेकिन रिपोर्ट पूरी तरह पलट गई। डॉक्टरों ने यह भ्रामक रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी है।
बरेली समेत आसपास के जिलों में निजी पैथालॉजी सेंटर ही डेंगू फैला रहे है। इससे मरीजों में खौफ का माहौल है। निजी डॉक्टर भी इसका भरपूर लाभ उटा रहे हैं। अमर उजाला ने पैथालॉजी सेंटरों की कार्यप्रणाली पर खबर प्रकाशित की थी, इसके बाद सेंटरों का यह एक और कारनामा सामने आया है। जिला अस्पताल में तीन अक्तूबर को दातागंज (बदायूं) से आई शिवानी गुप्ता को डेंगू बताया गया था। वह अपने साथ श्रेया पैथ लेबोरेटरी बदायूं की रिपोर्ट लेकर आईं थीं। फिजीशियन डॉ. वागीश वैश्य ने जब शिवानी की बीमारी की हिस्ट्री ली तो उसमें डेंगू के लक्षण नहीं मिले लेकिन रिपोर्ट में डेंगू पॉजिटिव था। उन्होंने तुरंत दोबारा जांच कराने को कहा। अगले दिन जब इसकी रिपोर्ट आई तो डॉ. वैश्य चौंक गए। जिला अस्पताल की रिपोर्ट में न तो डेंगू पॉजिटिव मिला और न ही टाइफाइड। एंटीजन तक निगेटिव था, जबकि डॉ. वैश्य का कहना है कि एंटीबॉडी भले ही एक दिन में परिवर्तित हो जाए लेकिन एंटीजन एक दिन में नहीं बदलता। बदायूं की जांच में शिवानी की प्लेटलेट्स काउंट 40 हजार थीं, लेकिन दोबारा हुई जांच मेें ये 45 हजार थीं। इसी तरह सोमवार को भी ओपीडी में एक मरीज निजी पैथालॉजी की रिपोर्ट लाया, उसमें भी डेंगू पॉजिटिव बताया गया था जबकि न तो मरीज को बुखार था और न ही डेंगू के कोई लक्षण।
निजी अस्पतालों को भेजे नोटिस, डेंगू रोगियों का ब्योरा मांगा
अमर उजाला में डेंगू मरीजों की खबर प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। आईडीएसपी (इंटिग्रेटेड डिसीज सर्विलांस प्रोग्राम) प्रभारी डॉ. अशोक कुमार ने सभी निजी अस्पतालों को नोटिस भेजकर उनके भर्ती डेंगू मरीजों का ब्योरा मांगा है। सिविल लाइंस स्थित एक अस्पताल में सबसे अधिक मरीज होने की सूचनाएं मिल रही हैं। इसके अलावा बदायूं रोड और रामपुरबाग के अस्पतालों में भी कई डेंगू मरीज भर्ती बताए जा रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन ने इनकी सूचनाएं स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी है।
जिला अस्पताल में एक डेंगू मरीज भर्ती
जिला अस्पताल में सोमवार को एक डेंगू मरीज दातागंज (बदायूं) की 21 वर्षीय अर्चना भर्ती हुई हैं। उन्हें कई दिन से बुखार था। जब वह स्थानीय डॉक्टरों के इलाज से ठीक नहीं हुई तो वह बरेली आ गईं। यहां जिला अस्पताल में जांच के दौरान डेंगू पॉजिटिव पाया गया। इनकी प्लेटलेट्स काउंट 45000 है। अर्चना को डेंगू वार्ड में भर्ती किया गया है।
ऐसे चल रहा है पैथालॉजी सेंटरों का खेल
स्वास्थ्य विभाग ने सिर्फ एलाइजा जांच को ही डेंगू की पुष्टि के लिए सटीक माना है, जबकि जिले में मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल को छोड़कर कहीं भी एलाइजा जांच की सुविधा नहीं है। निजी अस्पताल डेंगू के लक्षण होने पर कार्ड टेस्ट कराते हैं और फिर डेंगू पॉजिटिव आने पर इलाज शुरू कर देते हैं, जबकि यह रिपोर्ट विश्वसनीय नहीं होती। हालांकि निजी अस्पतालों को इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेजना अनिवार्य है लेकिन कोई निजी अस्पताल आईडीएसपी विभाग को सूचना नहीं भेज रहा है।
कोट
ओपीडी में हर हफ्ते दो से तीन मरीज डेंगू की रिपोर्ट लेकर आ रहे हैं। इनमें कुछ बरेली और ज्यादातर बाहर के होते हैं। दो मरीजों की रिपोर्ट देखकर तो मैं खुद हैरान रह गया। एंटीजन तक रिपोर्ट में पॉजिटिव बताए गए। पता नहीं कैसी रिपोर्ट सेंटर बना रहे हैं। इससे मरीजों के जीवन से खिलवाड़ हो रहा है।
- डॉ. वागीश वैश्य, फिजीशियन, जिला अस्पताल
सभी निजी अस्पतालाें को नोटिस जारी करके पिछले दिनों में भर्ती डेंगू मरीजों की सूचनाएं मांगी गई है। कार्ड टेस्ट से डेंगू की पुष्टि स्वीकार्य नहीं है। जब तक रोगी की एलाइजा जांच न करा ली जाए, उसे डेंगू से पीड़ित नहीं माना जा सकता।
- डॉ. अशोक कुमार, आईडीएसपी प्रभारी