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तो थान सिंह एसएफसी को कैसे मैनेज कर रहे हैं!

Tue, 04 Apr 2017 01:46 AM IST
बरेली।  
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राज्य खाद्य व आवश्यक वस्तु निगम के अफसर और राशन माफिया की मिलीभगत का एक और खेल सामने आने के बाद जिला प्रबंधक कार्रवाई की संस्तुति करने की बजाए कालाबाजारी में शामिल स्टाफ को बचाने में जुट गए हैं। पांच दिन पहले ग्राम उड़ला जागीर में राशन ब्लैक करने के मामले में शामिल गोदाम प्रभारी के खिलाफ अभी तक मुख्यालय को जानकारी तक नहीं दी गई है। इस मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज न होने पाए इसेक लिए भी पैरवी की गई। इस बीच प्रशासन ने जिला प्रबंधक का कच्चा चिट्ठा तैयार कर लिया है। कहा तो यही जा रहा है कि विभाग और नेताओं में प्रबंधक की बड़ी पहुंच है लेकिन तमाम खेल खुलने के बाद थान सिंह का नपना तय माना जा रहा है। सोमवार को एसएफसी के एमडी से जब बात की गई तो उन्होंने चौंकाने वाला बात बतायी कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई और न ही यहां के प्रबंधक या प्रशासन की और से कार्रवाई की कोई संस्तुति हुई है।
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बरेली मंडल में एसएफसी (राज्य खाद्य व आवश्यक वस्तु निगम) कोटेदारों तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली योजना के तहत गेहूं और चावल आपूर्ति कराता है। गोदामों का चार्ज चौकीदार और ड्राइवर संभाल रहे हैं और कुछ के पास दो से तीन गोदाम हैं। एसएफसी गोदाम प्रभारी अफसरों की शह पर  गरीबों को मिलने वाला गेहूं चावल ‘बड़ों’ के जारिए बाजार में बेच रहे हैं। उड़ला जागीर में नरियावल का हिस्सा तोड़कर गोदाम बनाना इसी खेल का हिस्सा था।

 हर स्तर पर दबाने की कोशिश
उड़ला जागीर के गोदाम में एसडीएम सदर अपूर्वा दुबे की मेहनत पर पानी फेरने के लिए हर स्तर पर इस मामले को दबाने के लिए राशन माफिया औ उनके खैरख्वाह अफसर सक्रिय है। विभाग के अफसर खुद मोर्चे पर लगे हैं। पांच दिन हो गए जिला प्रबंधन के फाइल आगे नहीं बढ़ाई वह अपनी पैरवी का असर देख रहे हैं। सोमवार रात उनसे बात की गई तो पहले तो बोले मैंने कल संस्तुति कर दी है और डाक से भेज दिया है। जब कहा गया कि कल तो रविवार था तो बोले शनिवार को दस्तखत किए फिर बताने लगे कि स्टाफ ने पत्र अभी भेजा नहीं है।  इस तरह के लोग क्यों प्रभारी बनाए हैं पूछा तो बोले स्टाफ नहीं है। मैंने विभाग को लिखा है। सूत्रों के अनुसार प्रशासन की रिपोर्ट भी अभी तक अटकी है। इसमें जिला प्रबंधक हटाने के साथ ही यह भी निष्कर्ष है कि पूरा सिस्टम उनके नियंत्रण से बाहर है। जिलाधिकारी मानते हैं कि यह बड़ा घोटाला है उन्होंने बताया वह इसे गंभीरता से ले रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इस मामले में कुछ पुराने और बड़े लोगों के शामिल होने की वजह से ढिलाई की जा रही है।   
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अवैध गोदाम से ब्लैक
नरियावल स्थित हाईवे पर गोदाम बना होने से कालाबाजारी में बाधा आती थी, इसलिए एसएफसी जिला प्रबंधक ने हाईवे से दूर गांव में गोदाम खुलवा दिया। बताया जाता है कि इसके लिए बाकायदा जिला प्रबंधक ने प्रस्ताव बनाया और तत्कालीन डीएम से स्वीकृत करा लिया था। इसके बाद उड़ला जागीर गोदाम में राशन कालाबाजारी का खेल शुरू हुआ। जो नई सरकार बनते ही गोपनीय सूचना के आधार पर गोदाम से ब्लैक करने का मामला 28 मार्च को पकड़ा गया।

सीज गोदाम खुला
डीएम के निर्देश पर सोमवार सुबह दस बजे एसडीएम अपूर्वा दुबे उड़ला जागीर पहुंचीं और सीज गोदाम खुलवाया। रात नौ बजे 19 दुकानदारों को कोटा जारी होता रहा। एआरओ रामेश्वर दयाल, इंसपेक्टर अकील अहमद, नायाब तहसीलदार अभय सिंह, बीडीओ अनिल चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।

वर्जन:
गोदामों से राशन कालाबाजारी गंभीर मामला है। मुझे रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। गोदाम प्रभारी चालक गुलाब सिंह को निलंबित करने की संस्तुति भी जिला प्रबंधक ने नहीं की है। स्टाफ मिलीभगत से हो रहे ब्लैक पर विभाग गंभीर है। दागी दंडित होंगे।
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- राम मनोहर मिश्रा, प्रबंध निदेशक, एसएफसी
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