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नए डीएम का आगाज तो अच्छा है, वेलकम टु बरेली

Wed, 31 Aug 2016 01:18 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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बरेली के नए डीएम  के पहले परिचय से शहर के लोग खुश भी हैं और थोड़ा हैरत में भी। नाम पंकज यादव और रहने वाले  मुख्यमंत्री के गृह जनपद इटावा के हैं। इस तरह के परिचय पर सिपाही तक के लिए रास्ता छोड़ देने वालों के लिए नए डीएम का बेहद लो प्रोफाइल में बरेली आगमन काफी हद तक चौंकाने वाला रहा। कोई हनक नहीं, बल्कि दूसरों की भी हनक उतार दी। उन्हें लेने के लिए रेलवे स्टेशन पर गाड़ी और आवाभगत करने वालों का कहीं पता नहीं था। श्रमजीवी एक्सप्रेस से रात में 2.23 बजे सामान्य मुसाफिर की तरह बरेली जंक्शन पर उतरे। कुछ समय स्टेशन का नजारा लिया, स्टेशन की चाय का स्वाद चखा और कुछ देर बाद टेंपो से सर्किट हाउस पहुंच गए। वहां पर उन्हें कोई चौकीदार नहीं मिला तो डीएम कैंप कार्यालय फोन करके अपने आने की सूचना दी। करीब आधा घंटे बाद चौकीदार उनके पास पहुंचा और उनके लिए वीवीआईपी कक्ष खोल दिया। तब तक वह सर्किट हाउस के बरामदे में बैग और ब्रीफकेस रखकर टहलते रहे।
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सुबह आठ बजे से उनसे मिलने के लिए अधिकारियों के आने का सिलसिला शुरू हुआ। साढ़े नौ बजे तक वहीं मुलाकात करते रहे। सुबह पौने दस बजे बरामदे से निकले। उन्होंने जैसे ही अपनी नीली बत्ती लगी काली इनोवा की ओर देखा तो उसी समय ड्राइवर को बुलाया और कहा कि नीली लाइट उतार दें। डीएम का निर्देश मिलते ही ड्राइवर ने नीली बत्ती उतार दी। यह नजारा वहां खड़े अफसरों ने देखा तो तहसीलदार सदर सहित कई अफसरों ने भी अपने-अपने वाहनों की नीली बत्ती उतरवा दी। कार में बैठते ही ड्राइवर और अर्दली को सीट बेल्ट लगाने की हिदायत दी। कलक्ट्रेट में करीब पांच मिनट तक तो अपने कक्ष में बैठे, उसके बाद कोषागार में पहुंचकर चार्ज लिया। करीब एक घंटे तक कलक्ट्रेट में बैठे और अधिकारियों के साथ परिचय किया। कुछ देर बाद कमिश्नर प्रमांशु कुमार से शिष्टाचार भेंट करने चले गए। अफसर हों या दूसरे मुलाजिम सभी एक बात कई तरह के कहते सुनाई दिए ये साहब तो कुछ अलग ही किस्म के हैं। 
ये हैं डीएम की प्राथमिकताएं
बरेली। जिलाधिकारी पंकज यादव ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए बरेली के लिए प्राथमिकताएं गिनाई और कहा कि वह अपने काम काज में पारदर्शिता रखेंगे। अधीनस्थ अधिकारियों को भी जनता के कामों को प्राथमिकता से कराने और पारदर्शिता बनाए रखने की सलाह दी है। वहीं दूसरी ओर जनता से भी अपेक्षा की वे आदर्श नागरिक की भूमिका निभाएं। अधिकारियों के सामने पेश की जाने वाली शिकायतों में पेशबंदी न करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि बरेली की कानून व्यवस्था प्राथमिकता में है। विधानसभा चुनाव के लिए तैयार की जाने वाली वोटर लिस्ट में पूरी तरह से पारदर्शिता बरती जाएगी। प्राथमिकता वाले विकास कार्य प्रभावित न हो और उनको समय से पूरा किया जाए। निर्माणाधीन विकास कार्य विधानसभा चुनाव की आचार संहिता जारी होने से पहले पूरे हों। साथ ही सभी सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता रहें, गोपनीयता के नाम पर लोगों को परेशान न किया जाए।
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स्वागत है, ये रहा आपका शहर
शहर में कई मसले हैं जो विभागीय तालमेल की वजह से अनसुलझे चल रहे हैं। कुछ अलग से और अच्छे लग रहे नए डीएम से शहर कुछ अपेक्षाएं तो कर सकता है। हाल कुछ ऐसा है-
हाल-ए शहर -अपने अंदाज में चल रहे नगर निगम से शहर वाले परेशान हैं। स्मार्ट शहर का झुनझुना हिला रहे बड़े लोग और हर तरफ अतिक्रमण और गंदगी। हाई वे तक सिकुड़ गए हैं। शहर में न नया डलावघर मिल पाया और न सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का मसला हल हो पाया।
यातायात- टेम्पो वालों की मनमानी, अवैध वाहन का रैला,और ध्वस्त ट्रैफिक सिस्टम। मानकों के बिना चल रहे स्कूली वाहन। अवैध बस स्टैंड, ट्रक और भारी वाहनों का सड़क पर कब्जा। सभी प्रमुख चौराहों पर जाम। 
सड़कें- शहर में नेशनल हाईवे और पीडब्लूडी की गड्डेवाली सड़कें जो कई विभागों के तालमेस से ही सही हो पाएंगी। कार्य संस्कृति-  सरकारी कार्यालयों में तालमेल का अभाव और कर्मचारियों की निरंकुशता। शौचालयों से लेकर मुआवजे तक के ढेरों घपले।
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बिजली- जमीन के अभाव में बिजलीघरों के निर्माण पर ब्रेक। 
सुरक्षा- सिविल इंक्लेव, त्रिशूल एयरबेस की सुरक्षा। 
कारोबार- दूध से लेकर तेल में मिलावट और एफएसएसआई की सजावटी सा अस्तित्व 
शिक्षा-  बरेली कालेज का ही माहौल सुधर जाए तो काफी है।
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