पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने का सरकार का आदेश आज से प्रभावी है। मगर, प्रशासन, नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अभी तक पॉलीथिन का इस्तेमाल रोकने की योजना पर चुप है। सीबीगंज और परसाखेड़ा में 10 से ज्यादा फैक्ट्रियां पॉलीथिन का उत्पादन कर रही हैं। थोक और फुटकर में पॉलीथिन का प्रतिदिन 12 करोड़ से ज्यादा का कारोबार हो रहा है। जब तक इस पर शिकंजा नहीं कसता, तब तक पॉलीथिन खत्म होने के आसार नहीं लगते।
राज्य सरकार ने सूबे में 21 जनवरी से पॉलीथिन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध प्रभावी करने के आदेश दिए हैं। 20 जनवरी प्रतिबंध का गजट भी जारी हो गया। बृहस्पतिवार से पॉलीथिन के भंडारण, बिक्री और ढुलाई पर भी प्रतिबंध रहेगा। मगर ये कैसे होगा, इसकी ठोस योजना न तो प्रशासन ने बनाई है, न ही नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने। न ही तीनों विभागों की इस दिशा में कोई संयुक्त बैठक बुलाई गई। नगर निगम जरूर सफाई और गंदगी के नाम पर चालान काटने का अभियान चला रहा है मगर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसर और कर्मचारियों को तो पता ही नहीं है कि पॉलीथिन पर सरकार ने प्रतिबंध भी लगा दिया है। स्वयं सेवी संगठन जरूर बाजारों में पॉलीथिन का इस्तेमाल न करने के लिए जन जागरूकता फैलाने की कोशिश में लगे हैं। फिलहाल, प्रशासन, नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लचर कार्यप्रणाली के चलते बाजारों से पॉलीथिन खत्म होने की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही।
रोजाना 12 करोड़ का कारोबार
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का राजेंद्र नगर में क्षेत्रीय कार्यालय है। क्षेत्रीय अधिकारी आरके त्यागी, सहायक इंजीनियर शशीबिंदुकर समेत लगभग एक दर्जन से ज्यादा कर्मचारियों का स्टाफ है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की एनओसी देने में अड़ंगे लगाने, बायोबेस्ट प्लांट और नगर निगम का स्लाटर हाउस बंद करने के अलावा हाल के बरसों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड न तक ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे शहर का प्रदूषण कम हो सके।
परसाखेड़ा, सीबीगंज समेत विभिन्न स्थानाें पर प्लास्टिक फैक्ट्रियां चल रही हैं। इनमें कैरी बैग, गिलास, कप, प्लेट समेत कई घरेलू उपयोगी और व्यापारिक आइटम बनाए जाते हैं। फैक्ट्री मालिक बाहर किसी अन्य नाम से बोर्ड लगाकर खाली परिसर में अवैध रूप से मशीनें लगाकर पॉलीथिन का उत्पादन कर रहे हैं। हर माह औसतन 12 करोड़ रुपये का कारोबार हो रहा है। 40 माइक्रॉन से कम की पॉलीथिन भी धड़ल्ले बनाकर बाजार में बेची जा रही है। इससे न केवल प्रदूषण फैलता है बल्कि नाला नाली भी जाम होते हैं।
‘कहां पॉलीथिन बन रही है और कहां बिक रही है, इसकी जानकारी हमें नहीं है। शासन या प्रशासन से हमारे पास पॉलीथिन प्रतिबंध का कोई लिखित आदेश भी नहीं आया है।’ शशीबिंदुकर, एई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
‘नगर निगम कूड़ा और पॉलीथिन इस्तेमाल के विरोध में अभियान चला जा रहा है। जो लोग प्रतिबंध का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके चालान काटे जा रहे हैं।’ ईश शक्ति कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त
पॉलीथिन इस्तेमाल के विरोध में उतरे संगठन
बरेली। बाजारों में पॉलीथिन के इस्तेमाल के विरोध में कई संगठन सड़क पर उतर आए हैं। जिला और महानगर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों ने पॉलीथिन के बहिष्कार का संकल्प लिया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामदेव पांडेय और महानगर अध्यक्ष चौधरी असलम मियां ने पॉलीथिन के इस्तेमाल पर चौकी चौराहा पर मानव श्रंखला बनाकर विरोध जताया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह प्रदूषण रोकने का संकल्प लें और पॉलीथिन का इस्तेमाल न करें। कार्यक्रम में कमलेश ठाकुर, किरन शिव, शकुंतला जौहरी, अमजद सलीम, अनुज गंगवार, मुकेश बाल्मीकि, नत्थूलाल मिश्रा, रवींद्र मिश्रा आदि मौजूद थे। पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र पांडेय, अल्पसंख्यक जोन प्रवक्ता जियाउर्रहमान, डा. नीतू मेहरोत्रा, उमेश आर्या, दीपक बाल्मीकि आदि ने भी पॉलीथिन के बहिष्कार का संकल्प जताया। उधर, समाज सेवी संस्था ‘पारस एजूकेशनल सोसायटी’ के सदस्यों ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत बड़ा बाजार, साहूकारा, नीम की चढ़ाई, सीताराम कूंचा, कन्हैया टोला आदि में भ्रमण कर पॉलीथिन का प्रयोग न करने की अपील की।