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Bareilly News: जिले के भूगोल पर टिका तस्करों का अर्थशास्त्र

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- हाथी रिजर्व बनाने की तैयारी में सरकार, पर व्यवस्था पर हावी हो रहे तस्कर
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बरेली। तस्करों को जिले की आबोहवा रास आ रही है। मादक पदार्थों की तस्करी के लिए बदनाम जिले में अब जाली नोटों व वन्यजीवों के अंगों की तस्करी के मामले भी सामने आने लगे हैं। इसके पीछे की वजह है शहर का भूगोल। यहां से उत्तराखंड और नेपाल करीब हैं। सुरक्षा एजेंसियों का शिकंजा कसने पर तस्करों को ठिकाना बदलने में आसानी होती है। शहर का यही भूगोल पुलिस व अन्य सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती साबित होता है।
मंगलवार को एसटीएफ ने दो हाथी दांत के साथ ग्रीन पार्क निवासी आदित्य विक्रम, लखीमपुर के निघासन थाना क्षेत्र निवासी नत्था सिंह और डोहरा रोड निवासी करन सिंह को गिरफ्तार किया था। तीनों ने बताया कि उनका गिरोह हाथी के दांतों की तस्करी करता है। ये दांत लखीमपुर के किसी व्यक्ति से खरीदे थे। हाल ही में पीलीभीत टाइगर रिजर्व में दो चीतलों के शिकार की बात सामने आई थी। इससे साफ है कि वन्यजीव तस्करों के निशाने पर हैं।
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प्रदेश सरकार हाथियों के संरक्षण के लिए तराई हाथी रिजर्व बना रही है। यह रिजर्व लखीमपुर खीरी, बहराइच, पीलीभीत व शाहजहांपुर जिलों में फैला होगा। जिस इलाके में देश का तीसरा हाथी रिजर्व बनने जा रहा है, उसी क्षेत्र में तस्करों को हाथी दांत कैसे मिल गया, यह बड़ा सवाल है। सेवानिवृत्त रेंजर गिरीश चंद्र सनवाल ने बताया कि पीलीभीत की हरीपुर, बराही, दुधवा की किशनपुर रेंज और उत्तराखंड के कार्बेट नेशनल पार्क व टांडा के जंगलों में हाथी पाए जाते हैं। हाथियों के झुंड नेपाल के शुक्ला फंटा से बाॅर्डर पार कर पीलीभीत, दुधवा और उत्तराखंड के जंगलों में भी आ जाते हैं। तस्कर अक्सर बड़े गड्ढे में गिराकर या जहर देकर हाथियों का शिकार करते हैं।
कायदे से हो जांच तो खुलेगा सिंडीकेट
हाथी दांत अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत महंगे बिकते हैं। वयस्क हाथी के दोनों दांतों की कीमत कई बार दो करोड़ से भी ज्यादा होती है। हाथी के दांत को कुछ बड़े लोग अपने रसूख के लिए घर में भी सजाते हैं। सही तरीके से मामले की जांच की गई तो वन्यजीवों के शिकार और उनके अंगों की तस्करी करने वाले बड़े सिंडीकेट का खुलासा हो सकता है।
प्रिंटर से घर बैठे छाप रहे नकली नोट
कुछ समय पहले तक पाकिस्तान और बांग्लादेश से जाली नोटों की तस्करी होती थी। अब कुछ मामलों से देखने में आया है कि उच्च गुणवत्ता वाले प्रिंटर के जरिये तस्कर घर में ही नकली नोट छाप रहे हैं। नोट के बीच में तार लगाने का जुगाड़ वह कलर कोडिंग के सहारे कंप्यूटर से ही कर लेते हैं। हाल ही में नवाबगंज में पकड़े गए तस्कर इसी तरह से नोट छाप रहे थे। पुलिस ने आशिफ और शोएब को गिरफ्तार कर उनसे 500 रुपये के 80 जाली नोट बरामद किए थे। तालिब, इरफान, लालू और मुशाहिद फरार हो गए थे। उनकी गिरफ्तारी के बाद बड़ा खुलासा हो सकता है। पिछले साल सीबीगंज क्षेत्र में भी नकली नोट बनाने का गिरोह पकड़ा गया था। वह गिरोह भी प्रिंटर के सहारे नकली नोट छापता था। अमर उजाला ब्यूरो
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उत्तराखंड एसटीएफ व वन विभाग के साथ मिलकर हाथी दांत के तस्कर पकड़े थे। सीबीगंज पुलिस रिपोर्ट लिखकर विवेचना कर रही है। एसटीएफ भी इन तस्करों से मिले इनपुट की मदद से आगे कार्रवाई कर सकती है। - अब्दुल कादिर, एएसपी एसटीएफ, बरेली
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