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Bareilly News: स्मार्ट सिटी का फूड कोर्ट दिसंबर तक भी नहीं हो सकेगा शुरू

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बरेली। पहले फूड कोर्ट के संचालन के लिए फर्म का चयन करने में देरी हुई। तीन बार निविदाएं निकालने के बाद जैसे-तैसे एक फर्म का चयन हुआ तो अब वह भी समय सीमा में व्यंजनों का स्वाद दिलाने की स्थिति में नहीं है।
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अनुबंध के हिसाब से निविदा लेने के बाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड के साथ अनुबंध करने वाली निजी फर्म को अक्तूबर तक फूड कोर्ट संचालित करना है। समय अवधि बीत गई पर फूड कोर्ट चालू नहीं हुआ। फर्म की ओर से तमाम कंपनियों के फूड आउटलेट लाने की तैयारी में 50 पक्की दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है। करीब 25 फीसदी निर्माण बकाया है। यह काम दिसंबर तक पूरा होने की स्थिति में भी नहीं है। नगर निगम के अ्रधिकारी कार्रवाई की तैयारी में हैं। एक नोटिस जारी किया गया है। अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन पर कार्रवाई की तैयारी है।
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अनुबंध होने के बाद छह महीने के भीतर फूड कोर्ट का संचालन होना था, लेकिन फर्म ऐसा नहीं कर सकी। मंडलायुक्त ने स्मार्ट सिटी की समीक्षा बैठक में नोटिस के निर्देश दिए थे। इसके बाद उन्होंने नोटिस दिया है। अब अवकाश के बाद कार्यालय खुलेंगे तो फर्म के जवाब का आकलन करेंगे। जवाब संतोषजनक न होने पर कार्रवाई होगी। -संजीव कुमार मौर्य, स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सीईओ
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लाइट एंड साउंड शो की होनी है शिफ्टिंग...काम शुरू नहीं हुआ
फूड कोर्ट के अनुबंध में सात करोड़ की लागत के लाइट एंड साउंड शो की शिफ्टिंग भी शामिल है। सिविल लाइंस की जेल के बाहर यह लगा था जिसे जेल प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से हटवा दिया था। अभी शिफ्टिंग के लिए कोई काम शुरू नहीं हो सका है। फर्म के संचालक राजीव तनेजा ने इससे पहले कहा था कि दिवाली तक फूड कोर्ट का संचालन कर सकेंगे, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो सका। अब वह बता रहे हैं कि सीएम ग्रिड योजना के काम चलने की वजह डीडीपुरम में मार्ग खोद कर डाल दिए गए। इसके साथ ही बारिश ने काम को लेट किया। दोनों वजह रहीं कि अभी निर्माण अधूरा है। दिसंबर तक काम पूरा करें। इसके बाद संंचालन के लिए दो महीने और चाहिए। इस संबंध में वह नगर आयुक्त के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे।
बदल गया फूड कोर्ट का स्वरूप

बरेली। स्ट्रीट फूड और वेंडर्स को प्रोत्साहन देने के लिए स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने अपनी परियोजना में फूड कोर्ट का निर्माण प्रस्तावित किया था। इसके तहत डीडीपुरम के पास टिनशेड बनाकर 50 वेंडर्स के लिए दुकानें बनाई गई थी। बाद में निजी एजेंसी को लाभ देने के लिए इसके स्वरूप में परिवर्तन किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। इसी मामले में अब जांच की मांग हुई है।
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