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Bareilly News: स्मार्ट सिटी... सीएम को चिंता, प्रक्रिया में उलझे अफसर-अभियंता

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बरेली। करोड़ों की लागत से तैयार स्मार्ट सिटी की परियोजनाएं धूल फांक रही हैं। जनता इनके संचालन का इंतजार कर रही है। मुख्यमंत्री को भी इसकी चिंता है। मंगलवार को समीक्षा बैठक के दौरान वह अर्बन हाट व अन्य परियोजनाओं का संचालन शुरू कराने की हिदायत भी दे गए, पर अफसर अपनी चाल चल रहे हैं। स्काई वॉक और अर्बन हाट के संचालन के लिए बार-बार टेंडर निकाले जा रहे हैं, पर कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है। बिजली कनेक्शन के लिए बजट न मिलने और कर्मचारियों तथा चिकित्सकों की नियुक्ति न किए जाने से यूनानी मेडिकल कॉलेज का संचालन भी अटका हुआ है।
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अर्बन हाट : आबाद होने के इंतजार में बाजार
174.70 करोड़ रुपये की लागत से गांधी उद्यान के निकट विकास भवन मार्ग पर बना अर्बन हाट छह माह बाद भी संचालन के इंतजार में है। यहां न तो बाजार आबाद हो सका, न ही किसी को रोजगार मिला। इसका निर्माण रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ स्थानीय हस्तशिल्पियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए कराया गया है।
113 करोड़ भवन पर खर्च, बिजली कनेक्शन के लिए धन नहीं
शहर के हजियापुर में 113 करोड़ रुपये की लागत से बना जिले का पहला और प्रदेश का तीसरा यूनानी मेडिकल कॉलेज छह महीने से बिजली कनेक्शन का इंतजार कर रहा है। यहां न तो पढ़ाई ही शुरू हो सकी, न ही मरीजों को इलाज मिल पा रहा है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने बिजली कनेक्शन के लिए पौने सात करोड़ रुपये नहीं दिए। इस वजह से मामला अटका है।
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मंत्री के दौरे के बाद शुरू हुई ओपीडी, अब ठंडी पड़ी
21 सितंबर 2024 को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर शहर आए थे तो उनके सामने अधिकारियों ने कुछ ही दिनों में ओपीडी शुरू करने की बात कही थी, पर यह पत्राचार तक ही सीमित रहा। क्षेत्रीय यूनानी अधिकारी डॉ. अब्बास अली खान का कहना है कि बगैर बिजली कनेक्शन के ओपीडी का संचालन मुश्किल है। अब तक भवन भी उनके विभाग को हस्तांतरित नहीं है। पहले भवन मिले, फिर डाॅक्टर तैनात हों तभी कुछ हो सकता है। ब्यूरो

अर्बन हाट के लिए निविदाओं का परीक्षण हो रहा है। जो फर्म अच्छे तरीके से अर्बन हाट और हैंडीक्राफ्ट सेंटर का संचालन करने में सक्षम होगी, उसे ही जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। - सुनील कुमार यादव, अपर नगर आयुक्त
यूनानी मेडिकल कॉलेज की वर्तमान स्थिति के ब्योरे के साथ शासन को पत्र भेजा गया है। पद सृजित करने का आग्रह भी किया गया है। बिजली कनेक्शन के लिए वस्तु स्थिति की जानकारी भी दी गई है। जैसे निर्देश मिलेंगे, उसी के अनुरूप काम होगा। - जगप्रवेश, मुख्य विकास अधिकारी
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स्काई वाॅक : 11 करोड़ खर्च, पर संचालन नहीं
शहर में 11 करोड़ रुपये की लागत से तैयार स्काई वाॅक का संचालन एक साल से अटका है। इसकी डिजाइन और उपयोगिता पर भी सवाल उठते रहे। स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने कई बार टेंडर निकाले। इस प्रक्रिया में एक फर्म तो मिल गई, लेकिन उसकी वित्तीय क्षमता का परीक्षण अभी पूरा नहीं हो सका है। अफसरों का कहना है कि वित्तीय स्वीकृति के बाद संचालन शुरू करा दिया जाएगा।
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