बरेली। बरेली स्मार्ट सिटी प्राइवेट लिमिटेड में पूर्व पीसीएस अफसर को नियुक्त कर सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने के मामले में अफसर उलझ गए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट मदन कुमार ने स्पष्ट कह दिया है कि सतीश कुमार को सर्किट हाउस में ठहरने की अनुमति नहीं दी गई थी जबकि सर्किट हाउस के अभिलेखों में करोड़ों रुपये की जमीन घोटाले के आरोपी सतीश कुमार ने एनेक्सी में ठहरने की प्रविष्टि दर्ज की है। अब इस मामले में लीपापोती हो रही है कि दागी अफसर सतीश कुमार को किसके आदेश पर सरकारी बंगला आवंटित हुआ और किसके आदेश पर उसे सजाने-संवारने का काम शुरू हुआ।
यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) में 126 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल पूर्व पीसीएस अफसर को स्मार्ट सिटी में मिशन मैनेजर पद पर नियुक्ति के खुलासे ने पर पूरी व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। इससे स्मार्ट सिटी बनाने में जुटे अफसरों की ‘स्मार्टनेस’ भी सामने आ गई है। हालांकि नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. का कहना है कि वह घोटालेबाज सतीश कुमार के क्रियाकलापों से अनभिज्ञ थे। लेकिन लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में किसी की नियुक्ति बिना छानबीन कैसे कर ली गई? जबकि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति करते समय भी चरित्र प्रमाण समेत तमाम जानकारियों की पुष्टि कराई जाती है।
गिरफ्तारी के बाद बंगले में काम रुका
करोड़ों के घोटाले और सीबीआई जांच में फंसे पूर्व पीसीएस अफसर सतीश कुमार की गिरफ्तारी के बाद 14 दिन के रिमांड पर भेजा गया है। स्मार्ट सिटी में भी कथित घोटालों की परतें खुलने से अधिकारी हिले हुए हैं। वहीं, एडीएम कंपाउंड परिसर मेें सतीश कुमार के लिए सजाए-संवारे जा रहे दस नंबर बंगला में काम रोक दिया गया है। बताया जा रहा है कि स्मार्ट सिटी प्रोेजेक्ट से संबंधित कई कागजात और फाइलें भी सतीश कुमार के पास हैं, जिसके चलते अफसर परेशान हैं।
लोगों में चर्चा, तैनाती के पीछे कौन
यीडा में तैनाती के दौरान करोड़ों का घोटाला करने वाले सतीश कुमार को मिशन मैनेजर पद पर तैनाती को लेकर हड़कंप मचा है। अमर उजाला के खुलासे के बाद लोग यह चर्चा कर रहे हैं कि सतीश की तैनाती के पीछे कौन कद्दावर अफसर है, जो 22 सौ करोड़ रुपये के स्मार्ट सिटी जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में घोटालेबाज अफसर को सारे नियम ताक पर रखकर नियुक्त कर दिया गया।