अनशन करने की दी चेतावनी
महापौर के बारे में कहा कि वह भी इस पद पर संतोष गंगवार की वजह से बैठे हैं। पांच दिन में महापौर का इस्तीफा नहीं लिया तो वह लोग अनशन करेंगे। जिन ब्राह्मणों ने महापौर के बयान पर ताली बजाई थी, उनका भी विरोध करते हैं। भाजपा प्रत्याशी ने भी इस बयान पर ताली बजाई थी, इसलिए उनके खिलाफ भी रोष है।
सांसद समर्थक जितेंद्र गंगवार ने महापौर के बयान की आलोचना करते हुए छत्रपाल गंगवार पर भी निशाना साधा। कहा कि वर्ष 1991 में बैठक के दौरान एक वरिष्ठ नेता ने संतोष गंगवार को अपशब्द कहा था तो भी छत्रपाल ने विरोध नहीं किया था।
टिकट कटने का दर्द आ रहा सामने
संतोष गंगवार का टिकट कटने के बाद से ही पार्टी में अंदरखाने फूट पड़ गई थी। संतोष गंगवार के समर्थक पहले ही छत्रपाल को टिकट मिलने का विरोध कर रहे थे। महापौर की कथित रिकार्डिंग वायरल होने के बाद संतोष के समर्थक छत्रपाल के खिलाफ भी बोल रहे हैं।
चर्चा है कि रिकॉर्डिंग तो बहाना है, संतोष गंगवार के समर्थक छत्रपाल को लोकसभा प्रत्याशी के तौर पर हजम नहीं कर पा रहे हैं। कुर्मी और ब्राह्मणों में दूरी पैदा कर छत्रपाल को नुकसान पहुंचाने का रास्ता तैयार किया जा रहा है।
निष्ठा पर सवाल खड़े कर रहा समर्थकों का बयान
प्रेसवार्ता के दौरान एक जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि हमारे महोदय जिस पार्टी में जाएंगे, वहीं हमारी पहचान होगी। सूत्रों के मुताबिक जिला पंचायत सदस्य ने ऐसा बयान किसी बड़े नेता के इशारे पर ही दिया है। उनके बयान को लेकर कई तरह की अफवाह है। संतोष खुद को पार्टी का सच्चा सिपाही बता रहे हैं पर उन्हीं के आवास पर इस तरह की गतिविधियां होने से लग रहा है कि पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं है।
सोशल मीडिया पर भी बहस
घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ी है। संतोष गंगवार के अपमान का बदला लेने के लिए पूर्व सांसद का फोटो लगाकर चुनाव बहिष्कार का बैनर तैयार किया गया है। संतोष समर्थक इस बैनर को फेसबुक और व्हाट्सएप पर पोस्ट कर रहे हैं। वहीं, बड़े नेता सबकुछ ठीक दिखाने का उपक्रम कर रहे हैं।