बरेली। हत्या के एक मामले में बरामद माल 44 तारीखें गुजर जाने के बाद भी अदालत में पेश नहीं किया जा सका। कोर्ट ने एसओ सिरौली पर पांच हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश हरेंद्र बहादुर सिंह ने किया।
सरकार बनाम हरिशंकर मुकदमे में रामपुर कोतवाली में तैनात थाना प्रभारी गजेंद्र त्यागी की गवाही होनी थी जो घटनाक्रम के दौरान सिरौली थाना प्रभारी थे। बावजूद मुकदमे से संबंधित माल कोर्ट में पेश नहीं किया जा सका। सिरौली थाने के पैरोकार ने एडीजीसी रीतराम राजपूत के जरिये कोर्ट में स्थगन पत्र देकर कहा कि माल मुंशी के अवकाश पर होने से माल मुकदमा हासिल नहीं हो सका। इस मामले में गवाह गजेंद्र त्यागी की गवाही 17 नवंबर, 21 फरवरी, 23 फरवरी को लिखी गई। हालांकि माल न आने से उनकी गवाही पूरी नहीं हो पा रही है। अदालत इस मामले में 44 तारीखें दी चुकी है। कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अपने आदेश में कहा कि यह मामला अदालत के सबसे पुराने मामलों में है। संबंधित केस का माल अदालत में पेश न करना थाना प्रभारी के स्तर पर घोर लापरवाही प्रकट करता है। कोर्ट ने एसओ सिरौली पर पांच हजार का हर्जाना लगाया। हर्जाने की राशि थाना प्रभारी से वसूलकर जमा कराई जाए।
एसएसपी से पूछा, क्या मान लें माल गायब हो गया
कोर्ट ने इस मामले में एसएसपी से कहा कि वह विशेष ध्यान देते हुए नियत तिथि 28 फरवरी पर माल मुकदमा न्यायालय में पेश कराना सुनिश्चित करें। अगर अगली तारीख तक उसे पेश नहीं किया जाता है तो यह माना जाएगा कि थाना सिरौली की पुलिस ने उसे गायब कर दिया है और आरोपियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।