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साहब! कब बनेगा शहर की 85 मलिन बस्तियों के विकास को रोडमैप

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प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। जनवरी के दूसरे सप्ताह में जिलाधिकारी द्वारा नगर आयुक्त को शहर के 85 मलिन बस्तियों की सूची सौंपी गई। यह सूची प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा के निर्देशों के अनुरूप ही बनाई गई थी। इस सूची के अनुरूप इन सभी बस्तियों में पक्की सड़कें, खड़ंजा और नाली आदि का निर्माण कराया जाना था। जिसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जाना था। इस कार्य के लिए पीडब्ल्यूडी के 15 और ग्रामीण अभियांत्रिकी के पांच जेई समेत निगम के आठ जेई को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी। कार्य 15 दिनों के अंदर कर लिया जाना था। प्रस्ताव में कार्य का स्टीमेट भी तैयार होना था जिसके आधार पर शासन से पैसे की मांग भी की जाती। पर नगर आयुक्त समेत निगम के किसी भी अधिकारी ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। ना ही इस कार्य को 14वें वित्त का हिस्सा बनाया गया। आंख तब खुली जब पिछले दिनों मेयर ने इस बाबत पत्र लिखकर नगर आयुक्त से मामले की जानकारी मांग ली।
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वहीं, सूत्रों की माने तो इन 85 मलिन बस्तियों में से कुछ बस्तियों का इस्टीमेट बनाया गया है। कुछ बस्तियों के लिए कार्यों के टेंडर आदि जारी करने की भी बात कही जा रही है। पर इस संबंध में तक सभी 85 मलिन बस्तियों की कंपाइल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट रिपोर्ट अब तक नहीं बनाई गई है और ना ही इसकी कोई जानकारी जिलाधिकारी को ही दी गई है। खुद निगम के दफ्तर में इस बात को लेकर पिछले एक महीने में कोई बैठक नहीं आयोजित की गई है। ना ही किसी को कोई जानकारी है। 13 फरवरी को मेयर उमेश गौतम ने एक बैठक में नगर आयुक्त से लिखित रूप में इसका विवरण भी मांग लिया है। पत्र में पूछा गया कि अब तक जिन मलिन बस्तियों की कच्ची गलियां नापने और उनपर विकास कार्य आपको दिया गया, उसमें कितना कार्य हुआ। वार्ड वार इसका विवरण और फोटो आदि भी तलब किया गया है।
इन मलिन बस्तियों को लेकर तैयार किया जाना था प्रस्ताव
टियूलिया, परसाखेड़ा, गौटिया, नदौसी, बंडिया, बंडिया गौटिया, हैदराबाद खडौआ, खलीपुर भाग-1 व 2, जौरहपुर, महेशपुर अटरिया, विधौलिया, रोठा मिल्क, पस्तौर, भगवंतापुर, गोविंदापुर, बाकरनगर सुंदरासी, सनैयारानी, सनौआ, सैदपुर हाकिंस, रामलीला गौटिया, मठकमलनैनपुर, मठ लक्ष्मीपुर, महलऊ, परतापुर चौधरी, श्रहपुरा, फरीदापुर चौधरी, फरीदापुर गौटिया, शिकारपुर, सिठौरा, सनैयाधान सिंह, गणेशनगर, वंशीनगर, शांति विहार, सुभाषनगर, राजीव का., तिलक कालोनी, हुसैनबाग, कटघर, बाकरगंज, चौपलागिहारबस्ती, किशोर बाजार, कोट, फखरुद्दीन अली अहमद, चक महमूद, चक महमूदनगर, हाजियापुर, अंबेडकर नगर हजियापुर, सकलैन नगर, खुर्रम गौटिया, कटरा चांद खां, नवादा शेखान, राजीवनगर गुलाब बाड़ी, आजादनगर, राजनगर, नगरिया परीक्षित, संतनगर वाल्मीकि बस्ती, गायत्रीनगर, कंजादासपुर, विहारमान नगला एक, परतापुर जीवन सहाय, छोटी बिहार, गौटिया शेर अली, हरुनगला, एजाजनगर गौटिया, बुखारपुरा, जाटवपुरा, गंगापुर वाल्मीकि बस्ती, माधोबाड़ी वाल्मीकि बस्ती, विष्णु इंटर का. वाल्मीकि बस्ती संजयनगर, जोगी नवादा, डेलापीर, प्यारे लाल कालोनी, इंद्रानगर वाल्मीकि बस्ती, अंबेडकर नगर उदयपुर खास, रफियाबाद, भुरावपुर, तालाब चौधरी, सुर्खा, मौलानगर, बानखाना, बाग गुददड़, छावनी अशरफ खां, बाके की छावनी, बरिया संदल खां।
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मलिन बस्तियों के विकास में डूडा शामिल होता तो अब तक बन जाता प्रस्ताव
शहर की सभी मलिन बस्तियों में कच्ची गलियों और नालियों का निर्माण कार्य डूडा के जिम्मे है। डूडा को ही इसका सर्वे कर इस्टीमेट बनाकर शासन को भेजना होता है। इसी के आधार पर शासन से धनराशि मिलती है और कार्य को आगे बढ़ाया जाता है। वहीं, नगर निगम के जिम्मे निगम में शामिल गांवों और वार्डों के विकास का कार्य होता है। डीएम यदि चाहते तो जिस तरह उन्होंने नगर आयुक्त को पीडब्ल्यूडी, ग्रामीण अभियांत्रिकी व नगर निगम के जेई को शामिल कर मलिन बस्तियों के विकास के निर्देश दिए, उसी तरह वह डूडा अधिकारियों को भी इस योजना में शामिल कर सकते थे। पर उन्होंने नहीं किया। यदि वह डूडा को शामिल करते तो अब तक यह प्रस्ताव बन भी चुका होता।
निगम को प्रस्ताव बनाने को कहा गया था। इसमें कुछ बस्तियों का प्रस्ताव और टेंडर आदि किए भी गए हैं। हालांकि इस संदर्भ में पूरी रिपोर्ट निगम से मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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- नितीश कुमार, जिलाधिकारी
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