बरेली। बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर में शनिवार से संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा आयोजन किया गया। वृंदावन से आए भागवताचार्य पं.सुरेश शास्त्री ने कहा कि भगवान सच्चिदानंद स्वरूप हैं। इसका अभिप्राय सत, चित व प्रकाश स्वरूप है। इनका स्मरण करने मात्र से व्यक्ति के तीनों प्रकार के पापों का शमन हो जाता है। उन्होंने बताया कि तीन प्रकार के पाप होते हैं- दैहिक, दैविक और भौतिक। उन पापों को दूर करने के लिए श्री राधा कृष्ण का ध्यान करें।
उन्होंने श्रीमद्भागवत को वेद वृक्ष का पका हुआ फल बताया, जोकि रस से परिपूर्ण फल है इसमें त्याग के लिए कुछ भी नहीं है अर्थात सब पावन ही पावन है। श्रीमद्भागवत कथा के मनन मात्र से व्यक्ति विशेष के सभी पापों से मुक्ति मिल सकती है।
कथाव्यास का मंदिर कमेटी के प्रताप चंद्र सेठ व मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल ने स्वागत किया। इस दौरान सुभाष मेहरा व हरिओम अग्रवाल का मुख्य सहयोग रहा। कथा के उपरांत आरती की व प्रसाद वितरण किया गया। कथा पांच जुलाई तक शाम चार से सात बजे तक चलेगी। संवाद