कीमतों में आया उतार-चढ़ाव
| तिथि |
सोना (10 ग्राम) |
चांदी (किलो) |
| आठ फरवरी |
1,61,000 |
2,61,000 |
| सात फरवरी |
1,62,000 |
2,40,000 |
| छह फरवरी |
1,58,000 |
2,45,000 |
| पांच फरवरी |
1,60,000 |
2,60,000 |
| चार फरवरी |
1,67,000 |
2,90,000 |
| तीन फरवरी |
1,59,000 |
2,66,000 |
(29 जनवरी 2026 को बरेली में चांदी 3.95 लाख रुपये किलो और सोना 1.90 लाख रुपये दस ग्राम था।)
अनिश्चित दौर में सुरक्षित निवेश की तलाश अहम वजह
डॉ. आशीष के मुताबिक, बीते दिनों सोने-चांदी के बढ़ते भाव सुर्खियों में रहे। रिश्तेदार, दोस्त, पड़ोसी आदि ने खरीदारी की तो कई लोगों को निवेश का सही वक्त प्रतीत हुआ। क्योंकि कीमतों में उछाल, शेयर बाजार में हलचल होती है तो गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने की ओर आदमी बढ़ता है। पिछले वर्ष के भाव से तुलना में लाभ प्रतीत होने पर खरीदारी की। देश में सोना और चांदी निवेश के सुरक्षित विकल्प भी माने जाते हैं।
विशेषज्ञ बोले- दीर्घकालिक योजना के तहत निवेश करना चाहिए
वित्तीय जानकार विपुल मेहरोत्रा के मुताबिक, कीमतों के बढ़ने के दौरान तमाम लोगों ने बिना सोचे समझे महज भविष्य में महंगाई के भय, भरोसे और सामाजिक सोच से खुद को जोड़कर खरीदारी की। जिन्होंने मुनाफे की उम्मीद में बचत के बजट से चांदी खरीदी, उनके सामने आर्थिक संकट की स्थिति से इन्कार नहीं कर सकते। कीमतें बढ़ें या घटें, जरूरत के अनुसार और दीर्घकालिक योजना के तहत निवेश करना चाहिए।