बरेली। बरेली कॉलेज प्रशासन ने प्रवेश कराने वाली एजेंसी सियारा इंफ्राटेक को अगले वर्ष से काली सूची में डाल दिया है। एजेंसी इस वर्ष भी तृतीय व पंचम सेमेस्टर के प्रवेश कार्य से अलग रहेगी। वहीं, कॉलेज प्रशासन ने कम मेरिट के बावजूद प्रवेश प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों की सूची सार्वजनिक करने से इन्कार कर दिया है।
प्रवेश एजेंसी की गलती के चलते जिन 115 अभ्यर्थियों की कम मेरिट के बावजूद फीस जमा कर ली गई, उनमें से 101 को प्रथम व द्वितीय चरण की मेरिट में समायोजित कर दिया गया है। 14 अभ्यर्थियों को बुलाकर काउंसिलिंग की जाएगी। इनका समायोजन न होने पर इनकी फीस लौटाई जाएगी।
मुख्य प्रवेश नियंत्रक प्रो. वंदना शर्मा ने बताया कि एजेंसी की गलती की सजा इन अभ्यर्थियों को नहीं दी सकती है। जो अभ्यर्थी समायोजित हो चुके हैं वे बरेली कॉलेज के विद्यार्थी हो गए हैं। जो शेष हैं उनकी काउंसिलिंग की जाएगी।
प्रोफेसर वंदना ने स्पष्ट किया कि एजेंसी के पास इस वर्ष के अभ्यर्थियों का डाटा है। प्रवेश प्रक्रिया के बीच में काम करने के लिए कोई अन्य एजेंसी तैयार नहीं हुई, इसलिए इसी एजेंसी से काम लिया जा रहा है। हालांकि, स्नातक में तृतीय व पंचम सेमेस्टर व परास्नातक के प्रथम व तृतीय सेमेस्टर की प्रवेश प्रक्रिया में यह एजेंसी शामिल नहीं होगी।
अगले वर्ष भी प्रवेश प्रक्रिया इस एजेंसी के जरिये नहीं कराई जाएगी। एजेंसी को अगले वर्ष से काली सूची में डाल दिया गया है। तृतीय व पंचम सेमेस्टर की प्रवेश प्रक्रिया की जिम्मेदारी पुरानी एजेंसी सेलेस्टे ऑनलाइन सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड को देने पर विचार किया जा रहा है। कम मेरिट के बावजूद जिन्हें प्रवेश मिला है, उनके नाम भी सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। हालांकि, बरेली कॉलेज में वर्ष 2015 में कथित छात्र नेताओं व दलालों के माध्यम से प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके नाम सार्वजनिक किए गए थे।
ज्यादा मेरिट के बावजूद कई को नहीं मिला प्रवेश
इन दिनों कई अभिभावक अपने बच्चों के प्रवेश के लिए कॉलेज व इंटरनेट कैफे के चक्कर लगा रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि एजेंसी की गलती की सजा उन छात्रों को मिली है। अच्छी परसेंटेज होने के बावजूद पहले सीटें भरने के चलते हमारे बच्चों को प्रवेश ही नहीं मिल पाया।