श्यामगंज फ्लाईओवर पर कोटेड वायर बांधे जाने के बाद मांझे से होने हादसे तो थम गए हैं, लेकिन अब दोनों छोरों पर लगे डिवाइडर लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। बिना रिफ्लेक्टर के ये डिवाइडर रात में दूर से नहीं दिखते, लिहाजा गति तेज होने पर वाहन इनसे टकरा जाते हैं। पुल के उत्तरी किनारे के दो डिवाइडर गाड़ियां टकराने से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। साथ ही इनसे बड़ा हादसा होने की भी आशंका बनी हुई है।
श्यामगंज पुल शुरू होने के बाद मांझे से हादसे हो रहे थे। किसी की गर्दन कटी तो किसी की नाक। करीब दर्जन भर लोग मांझे के शिकार हुए। अमर उजाला के सुझाव पर सेतु निगम ने किला पुल की तरह श्यामगंज पुल पर भी स्ट्रीट लाइट के पोल पर कोटेड वायर बंधवा दिए। इसका नतीजा भी अच्छा आया। आसपास के लोगों का कहना है कि तीन दिनों से पुल पर कोई हादसा नहीं हुआ। हालांकि पुल पर तेज गति से गाड़ियां दौड़ाने और गलत टर्न लेने की वजह से अब भी हादसे हो रहे हैं। गाड़ियों की टक्कर से पुल के उत्तरी सिरे पर बनाए गए दो डिवाइडर टूट गए हैं।
रफ्तार पर भी हो पाबंदी
पुल पर जबसे तार लगा है, मांझे का खतरा खत्म हो गया है। अब हादसे नहीं हो रहे हैं, वरना रोज ही एक-दो लोग मांझे की चपेट में आ जाते थे। - अनवर, श्यामगंज
तार लगने के बाद मांझे से कटने का खतरा खत्म हो गया है लेकिन अब लोग गलत साइड से आकर डिवाइडर से टकरा रहे हैं। स्पीड पर काबू करना जरूरी है। - हिमांशु, श्यामगंज
तार लगाने से पहले रोज ही कोई न कोई मांझे की चपेट में आकर घायल हो जाता था। अगर यह तार पहले ही लगा दिया जाता तो इतने हादसे नहीं होते। - फिरोज, श्यामगंज
पुल के नीचे सड़क बनवाए प्रशासन
जनसेवा मंच की ओर से जिला प्रशासन से पुल के नीचे बढ़ी समस्याओं ध्यान देने की अपील की गई है। मंच की बैठक में कहा गया कि सड़क टूटी होने से उड़ रही धूल के चलते शहदाना रोड पर दुकानदार और आम लोग एलर्जी और इंफेक्शन के शिकार हो रहे हैं। प्रशासन जल्द सड़क का निर्माण कराए। पुल के आसपास पतंगबाजी न करने की भी अपील की गई। बैठक में मंच के अध्यक्ष पम्मी वारसी, डॉ. सीताराम राजपूत, हाजी अब्दुल लतीफ कुरैशी आदि ने विचार व्यक्त किए।