बरेली। दुष्कर्म के आरोप से दोषमुक्त किए गए श्रवण और गुड्डू का कहना है कि यह न्याय की जीत है, लेकिन समाज में अपमान और जेल में उन्होंने जो प्रताड़ना झेली उसे ताउम्र नहीं भूल सकेंगे। वह चीख-चीख कर बेगुनाही के सबूत देते रहे पर तत्कालीन इंस्पेक्टर ने उनकी एक न सुनी। श्रवण को पुलिस ने शादी के दो दिन बाद ही जेल भेज दिया। गुड्डू भी उस समय बीए का छात्र था। उसकी उम्र 22 साल है।
श्रवण का कहना है कि उसे आठ और गुड्डू को नौ माह के बाद जमानत मिली। दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली महिला की उम्र 48 साल है। उसकी शादी से पहले महिला ने 20 लाख रुपये की मांग की थी। महिला की पुलिस से मिलीभगत थी। यही वजह रही कि एक साल दो माह बाद उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई और पुलिस ने बिना जांच पड़ताल उनको जेल भेज दिया।
गुड्डू आठ बहनों में इकलौता भाई है। उसके परिवार को भी प्रताड़ना और सामाजिक बदनामी का सामना करना पड़ा। श्रवण ने मांग की कि उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने और चार्जशीट लगाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
उसने बताया कि दोनों का परिवार कोर्ट के फैसले से काफी खुश है। यह न्याय की जीत है। जब वह जेल गया उसी साल उसने बीए पास किया था। गुड्डू बीए तृतीय वर्ष का छात्र था। पुलिस ने इन पहलुओं को भी नहीं देखा। उनको न्यायालय पर पूरा भरोसा था।