नगर निगम का मोहनपुर ठिरिया स्लाटर हाउस बंद करने के आदेश दिए गए हैं। ये स्लाटर हाउस निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं चल रहा था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने जांच के बाद स्लाटर हाउस बंद करने के लिए नगर निगम को नोटिस दिया था। इसके बाद नगर आयुक्त ने स्लाटर हाउस बंद करने के आदेश जारी कर दिए। स्लाटर हाउस 13 दिसंबर से बंद कर दिया जाएगा।
नगर निगम के रिकार्ड के मुताबिक मोहनपुर ठिरिया स्लाटर हाउस में प्रतिदिन 60 बड़े जानवर काटे जाते थे। हालांकि स्लाटर हाउस में कटने वाले जानवरों की संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। नगर निगम को प्रति पशु 25 रुपये राजस्व प्राप्त होता है। स्लाटर हाउस में बीते तीन साल से कोई डॉक्टर तैनात नहीं है। इससे रोजाना कटने वाले पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं होता है। दूसरी बात स्लाटर हाउस में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं लगा है। इससे स्लाटर हाउस में कटने वाले पशुओं का वेस्ट और खून बहकर नकटिया नदी से होकर रामगंगा के जल को प्रदूषित करता है। पूर्व वर्ती यूपीए सरकार के कार्यकाल में इस स्लाटर हाउस को मार्डन बनाने की बात हुई थी। इसमें स्लाटर हाउस कवर्ड कराने के साथ मशीन से जानवर कटना और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाना शामिल था। इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हो पायी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 16 अक्टूबर 2014 को स्लाटर हाउस बंद करने के लिए नगर निगम को नोटिस भेजा था। उस समय नगर निगम ने पीसीबी को भेजे स्पष्टीकरण में स्लाटर हाउस मार्डन बनाने की प्रक्रिर्या का हवाला देकर छह माह की मोहलत मांगी थी। नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव ने न्यायालय के अनुपालन और पीसीबी के नोटिस के मद्देनजर स्लाटर हाउस बंद करने के आदेश दिए हैं।
‘स्लाटर हाउस बंद करने के बारे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का पत्र आया था। इसको देखते हुए स्लाटर हाउस बंद करने के आदेश दिए गए हैं।’ उत्तम कुमार वर्मा, पर्यावरण अभियंता नगर निगम