बरेली। हजरत इमाम हुसैन और दीगर शहीदाने करबला के चालीसवें पर घरों और इमामबाड़ों में अकीदत और एहतेराम के साथ की अजादारी गई। गढैया के इमामबाड़ा सरदार हुसैन पर चल रहे महिलाओं के अशरे के आखिरी रोज मातमे हुसैन के बाद इमामबाडे़ में सजे हुए अलम ...या हुसैन अलविदा, या हुसैन अलविदा की सदाओं के साथ बढ़ा दिए गए।
मोहल्ला जखीरा स्थित इमामबाड़ा कमाल नकवी और इमामबाड़ा जुर्रियत हुसैन से मजलिसों के बाद जुलूस-ए-चेहल्लुम बरामद हुआ। जो खन्नू मोहल्ला, गढैया, फूटा दरवाजा, फूल वालान, डोमनी मस्जिद, कंघी टोला, किला सब्जी मंडी होता हुआ मुहल्ला छीपी टोला के इमामबाड़ा फतेह अली शाह मारूफ काला इमामबाड़ा पहुंचा। वहां मजलिस के बाद जुलूस रवाना हुआ। अंजुमनें नौहा ख्वानी और सीनाजनी करते हुए स्वाले नगर स्थित करबला स्थित रोजा-ए-इमाम पर हुसैन पहुंचे और शहीदाने करबला को खिराजे अकीदत पेश किया। जुलूस में नौजवानों और बच्चों ने छुरियों के मातम से जिस्म को लहूलुहान कर दिया। इस दौरान लब्बैक-या हुसैन... लब्बैक-या हुसैन... की सदाएं फिजाओं में बुलंद होती रही। जुलूस के समापन पर ताजिये दफन किए गए। इसके बाद सभी ने अपने-अपने अजीजों की कब्रों पर चिरागा करते हुए नौहाख्वानी और सीनाजनी की।
नियाज और लंगर भी हुआ
बरेली। सुबह से ही मुस्लिम घरों में नियाज नजर का सिलसिला शुरू हो गया था। लोगों ने तरह-तरह के पकवान बना कर नियाज कराई और तबर्रुक बांटे। शहर के कई स्थानों पर लंगर भी किया गया। बाकरगंज स्थित करबला पर भी लोग सुबह से ही हाजिरी देने पहुंच गए थे। शाम को चिरागा कर लोगों ने दुआएं मांगी। इस बीच कुछ इलाकों के ताजिये भी यहां पहुंचे। जिन्हें करबला में दफन कर नियाज पेश की गई