बरेली। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने दिसंबर में ही निर्देश दिया था कि गर्मियों में पर्याप्त बिजली आपूर्ति के लिए फरवरी तक जरूरी काम पूरे कर लिए जाएं। मार्च में बरेली आए तो भी यही बात दोहराई। प्रभारी मंत्री होने के नाते उम्मीद थी कि बरेली के अफसर ऊर्जा मंत्री के निर्देशों को गंभीरता से लेंगे लेकिन हालत यह है कि पूरा जिला सर्वाधिक संकट झेल रहा है। शुक्रवार को ढाई लाख से भी ज्यादा आबादी ने लगभग पूरे दिन अघोषित कटौती झेली। अब शनिवार को भी अनुरक्षण कार्यों के लिए कई इलाकों में कटौती का एलान किया गया है।
बिजली इस बार गर्मी की शुरुआत से ही लोगों को बेहाल कर रही है। कुछ समय से पूरा जिला भीषण संकट झेल रहा है। शुक्रवार को भी हालात पटरी पर नहीं आए। शहर के दो दर्जन से ज्यादा इलाके पूरे दिन बिजली का संकट झेलते रहे। भुता इलाके के सैकड़ों गांवों में तो पूरी तरह ब्लैक आउट रहा। दरअसल जुलाई की भीषण गर्मी में भुता सबस्टेशन पर ट्रांसफार्मर की क्षमता में वृद्धि की जा रही है। इसी वजह से सुबह आठ बजे गुल हुई बिजली देर रात तक नहीं आई। शहर के लोगों का हाल लोकल फाल्टों ने खराब किया। लोकल फाल्ट की वजह से सुभाषनगर इलाके में दिन के समय पांच घंटे से ज्यादा समय तक बिजली नहीं आई। इसके अलावा सिंधुनगर और किला कई और इलाकों में फाल्ट होने के बाद घंटों के लिए बिजली गुल हो गई। लोगों के शिकायत दर्ज कराने के बाद भी फाल्ट को ठीक करने में घंटों लगा दिए गए।
तिलमिलाते रहे लोग, अफसरों ने स्विच ऑफ कर लिए फोन
दोपहर के वक्त भीषण गर्मी में बिजली गुल हो जाने से लोग बुरी तरह तिलमिलाते रहे। भुता में तो 12 घंटे से भी ज्यादा समय तक कटौती होने की वजह से इनवर्टर भी फेल हो गए। चूंकि इस कटौती की कोई घोषणा नहीं की गई थी लिहाजा लोग दिन भर सबस्टेशनों पर फोन लगाते रहे लेकिन कॉल रिसीव ही नहीं हुई। उपभोक्ताओं को जवाब देने से बचने के लिए अफसरों ने भी सुबह से ही अपने फोन स्विच ऑफ कर लिए। बमुश्किल कुछ उपभोक्ताओं की एक्सईएन यूसी सोनकर से फोन पर बात हो पाई तो उन्होंने उन्हें मरम्मत की वजह से कटौती होने की जानकारी दी। इसके बाद आनन-फानन उपभोक्ताओं के पंजीकृत मोबाइल नंबरों पर मेसेज भी भिजवाए गए। ट्रंासफार्मर बदलने के बाद भुता क्षेत्र में देर रात बिजली सप्लाई चालू हो पाई।
चिराग तले अंधेरा... फाल्ट के बाद चीफ ऑफिस भी अंधेरे में डूबा
पूरे जोन में बिजली सप्लाई के लिए जवाबदेह चीफ इंजीनियर का ऑफिस भी बिजली के संकट से नहीं बच पाया। लोकल फाल्ट की वजह से चीफ इंजीनियर कार्यालय की भी बिजली शुक्रवार को गुल हो गई। दोपहर के वक्त करीब एक बजे चीफ ऑफिस के अधिकांश कमरो में अंधेरा पसरा दिखा। सूचना दिए जाने के बाद पावर कॉरपोरेशन की टीम आनन-फानन सीढ़ी लेकर मौके पर पहुंची। फाल्ट को ठीक करने में भी करीब चालीस मिनट का समय लगा। इसके बाद ऑफिस में बिजली चालू हो पाई।
ऊर्जा मंत्री ने हर समीक्षा बैठक में कहा था- गर्मी में न हो पब्लिक को परेशानी
ऊर्जा मंत्री की ओर से 24 दिसंबर को मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के अधीन जिलों की समीक्षा बैठक के दौरान गर्मियों में ठीक ढंग से बिजली की आपूर्ति के लिए फरवरी तक सारे इंतजाम पूरे करने के कड़े निर्देश दिए थे। मार्च में बतौर प्रभारी मंत्री वह बरेली के दौरे पर पहुंचे तब भी उन्होंने इस काम में लेटलतीफी पर नाराजगी जताते हुए तेजी से उसे पूरा करने का निर्देश दिया था। चीफ इंजीनियर को इसकी मॉनिटरिंग करने को भी कहा था। इसके बावजूद अफसरों ने ऊर्जा मंत्री के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया। पेड़ों की छंटाई और ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्घि जैसे काम जो गर्मी से पहले ही होने थे, वे अब किए जा रहे हैं। तमाम छोटे ट्रांसफार्मरों की क्षमतावृद्घि अब भी लंबित है। देहात में जर्जर बिजली लाइनें नहीं बदली गईं जिसकी वजह से अब जमकर फाल्ट हो रहे हैं। लोग गर्मी से तो जूझ ही रहे हैं, सिंचाई भी प्रभावित हो रही है।
आज किला में चार और कुतुबखाना के इलाकों में पांच घंटे गुल रहेगी बिजली
बरेली। मरम्मत के कामों के लिए शहर के 15 हजार से अधिक घरों को शनिवार को भी बिजली संकट झेलना पड़ेगा। पावर कॉरपोरेशन ने कुतुबखाना और किला क्षेत्र में शटडाउन लिया है।
किला में सुबह आठ से दोपहर एक बजे और कुतुबखाना उपकेंद्र से पोषित इलाकों में दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक बिजली नहीं आएगी। कुतुबखाना के एसडीओ गौरव शर्मा ने बताया कई लाइनों से आपूर्ति में दिक्कत आ रही है लिहाजा उनसे छू रहीं पेड़ों की टहनियों की छंटाई के साथ स्विचगेयर टेस्ंिटग और मेंटिनेंस के काम किए जाएंगे। इस कारण कुतुबखाना सबस्टेशन से जुड़े कोहाड़ापीर, आलमगीरीगंज, जिला अस्पताल, आजमनगर, घंटाघर, कोतवाली, सिकलापुर, पुराना रोडवेज अड्डा और ब्रह्मपुरी में चार घंटे बिजली नहीं आएगी। इसके अलावा मिशन कंपाउंड से पोषित 11 केवी किला फीडर से जुड़े सिटी सब्जी मंडी, मलूकपुर, बिहारीपुर, जीजीआईसी आदि क्षेत्र में भी सुबह आठ बजे से दोपहर एक बजे तक आपूर्ति नहीं होगी।
50 मिनट भी नहीं चला 50 लाख का ट्रांसफार्मर
बृहस्पतिवार को लाल फाटक पर लगाया गया था उच्च क्षमता का ट्रांसफार्मर
बरेली। ओवरलोडिंग और ट्रिपिंग से लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए लाल फाटक सबस्टेशन पर लगाया गया उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर में बृहस्पतिवार की रात लोड पड़ते ही तेज धमाके के साथ आग लग गई। 50 लाख से ज्यादा कीमत का ट्रांसफार्मर 50 मिनट में ही जलकर बर्बाद हो गया।
ट्रांसफार्मर खरीदते समय ठीक से जांच न करने की वजह से पावर कॉरपोरेशन को पहले भी करोड़ों की चपत लगा चुकी है। अब भी उपभोक्ता इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। ट्रांसफार्मर की खरीद में एक बार फिर धांधली उजागर हुई है। लाल फाटक सबस्टेशन पर ओवरलोडिंग दूर करने के लिए बृहस्पतिवार को पांच एमवीए के बजाय आठ एमवीए का ट्रांसफार्मर लगाया गया था। रात आठ बजे के बाद इससे बिजली सप्लाई शुरू की गई। 50 मिनट बाद जैसे ही लोड बढ़ा, तेज धमाके के साथ ट्रांसफार्मर में आग लग गई और बिजली गुल हो गई। आनन-फानन में अधिकारियों ने पुराने ट्रांसफार्मर को चार्ज कर सप्लाई चालू कराई। फजीहत से बचने के लिए अधिकारी लाखों का ट्रांसफार्मर जलने का मामला दबा गए। शुक्रवार को पावर कॉरपोरेशन के दफ्तर में यह चर्चा आम हुई तो ट्रांसफार्मर की खरीद प्रक्रिया पर फिर सवाल उठने लगे।
कई बार ट्रांसफार्मर लगाने के दौरान फाल्ट पकड़ में नहीं आ पाता है। ट्रांसफार्मर क्यों फुंका, इसकी जांच कराई जा रही है। निर्माण में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित फर्म को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। इलाके में रात में ही वैकल्पिक इंतजाम कर बिजली चालू करा दी गई थी। - यूसी सोनकर, अधिशासी अभियंता