1991 के चुनाव में मिली हार
छात्र राजनीति के दौरान कई आंदोलनों का हिस्सा बने शरद यादव ने वर्ष 1991 का लोकसभा चुनाव फिर से बदायूं सीट से ही लड़ा, लेकिन भाजपा के स्वामी चिन्मयानंद ने उन्हें हरा दिया। इस हार की वजह सार्वजनिक रूप से तत्कालीन डीएम को बता चुके थे। इसके बाद बदायूं से खासकर राजनीतिक स्तर पर उनका मोहभंग हो गया।
इसके बाद बिहार की राजनीति में सक्रिय होकर उन्होंने मधेपुरा को चुना। बदायूं जिले से चुने जाने से पहले उन्होंने उन्होंने हर विधानसभा क्षेत्र में अपनी पैंठ बना ली थी। उनकी राजनीति के जानकारों मे बिल्सी के सोबरन सिंह बताते हैं कि शरद यादव के सभा करने की भनक लगते ही लोग खुद इकट्ठे हो जाया करते थे। शरद यादव ने चुनाव से पहले बिल्सी में ऐतिहासिक रैली की थी।