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Sharad Yadav: शरद यादव ने बदायूं लोकसभा सीट से 1989 में हासिल की थी जीत, केंद्र सरकार में बने थे मंत्री

Fri, 13 Jan 2023 09:47 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं,

सार

पिछड़ों के नेता के रूप में पहचान कायम कर चुके शरद यादव ने वर्ष 1989 का लोकसभा चुनाव बदायूं से लड़ा। यहां जीत दर्ज कर सांसद बने। इसके बाद केंद्र सरकार में मंत्री बनाए गए थे। 
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शरद यादव - फोटो : social media
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विस्तार
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नब्बे के दशक में बदायूं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले शरद यादव को अगर अगले लोकसभा चुनाव में हार का सामना नहीं करना पड़ता तो उनका जिले से मोहभंग नहीं होता। उनका राजनीतिक जीवन सबसे ज्यादा विपक्ष में गुजरा, लेकिन बदायूं जिले से नाता फिर भी बरकरार रहा। वह बदायूं को छोड़ना नहीं चाहते थे, लेकिन भाजपा के स्वामी चिन्मयानंद से हारने के बाद वह असहज हो गए थे।

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पिछड़ों के नेता के रूप में पहचान कायम कर चुके शरद यादव ने वर्ष 1989 का लोकसभा चुनाव बदायूं से लड़ा। उस वक्त जिले के लोगों ने एक राष्ट्रीय नेता को इसलिए प्राथमिकता दी कि केंद्र में सरकार बनने पर वह जिले के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे। वीपी सिंह प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने शरद यादव को कपड़ा और खाद्य प्रसंस्करण विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया। 

मंत्री बनने के बाद वह जनता का आभार व्यक्त करने के लिए जिले में आए तो लोगों को उम्मीद जागी कि वह कपड़ा फैक्टरी लगवाने की घोषणा करेंगे। इसके विपरीत, शरद यादव ने कोई घोषणा नहीं की। वह केंद्र की राजनीति में चमकते रहे, लेकिन जिले के विकास के लिए कोई बड़ी योजना लागू नहीं करा पाए।

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1991 के चुनाव में मिली हार 

छात्र राजनीति के दौरान कई आंदोलनों का हिस्सा बने शरद यादव ने वर्ष 1991 का लोकसभा चुनाव फिर से बदायूं सीट से ही लड़ा, लेकिन भाजपा के स्वामी चिन्मयानंद ने उन्हें हरा दिया। इस हार की वजह सार्वजनिक रूप से तत्कालीन डीएम को बता चुके थे। इसके बाद बदायूं से खासकर राजनीतिक स्तर पर उनका मोहभंग हो गया। 

इसके बाद बिहार की राजनीति में सक्रिय होकर उन्होंने मधेपुरा को चुना। बदायूं जिले से चुने जाने से पहले उन्होंने उन्होंने हर विधानसभा क्षेत्र में अपनी पैंठ बना ली थी। उनकी राजनीति के जानकारों मे बिल्सी के सोबरन सिंह बताते हैं कि शरद यादव के सभा करने की भनक लगते ही लोग खुद इकट्ठे हो जाया करते थे। शरद यादव ने चुनाव से पहले बिल्सी में ऐतिहासिक रैली की थी।
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