शहर की प्रमुख मंडी शहामतगंज में बनाई जा रही ‘प्रिया’ ब्रांड की केमिकल हल्दी को एफएसडीए की रिपोर्ट में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया गया है। वाराणसी स्थित प्रयोगशाला ने इसमें ‘मेटेनिल यलो’ कलर की मिलावट की बात कहते हुए खाने के लिए प्रतिबंधित बताया है। यह भी खुलासा किया है कि इस कलर को खिलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि इसका दिमाग, लीवर, किडनी और हार्ट पर सीधा असर पड़ता है। रिपोर्ट के बाद जिला खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी ने इस ब्रांड की हल्दी को मार्केट से हटाने के निर्देश दिए हैं। पंद्रह दिन में जवाब भी मांगा है। उसी के बाद विक्रेता और कंपनी के खिलाफ एसीजेएम (प्रथम) के न्यायालय में मुकदमा दायर किया जाएगा।
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी अजय जयसवाल ने बताया कि अगले साल अक्तूबर के महीने में शहामतगंज इलाके में छापा मारकर दो दुकानों से प्रिया ब्रांड की हल्दी के नमूने लिए थे। इनको परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि पैकिंग के नियमों का भी पालन नहीं किया गया है। पैकिंग में ठीक से वजन अंकित नहीं है। न ही पैकिंग के मानकों का पालन हुआ है। पैकिग मिस बैच है तथा (रेग्यूलेशन) तक पूरे नहीं किए गए हैं। पैकिटों पर पता भी गलत लिखा हुआ है। ‘मेटेनिल कलर युक्त हल्दी दिमाग पर सीधे असर करती है। लीवर, किडनी और हार्ट को भी प्रभावित करती है। धीरे-धीरे व्यक्ति का पाचन तंत्र पूरी तरह से बैठ जाता है और कैंसर जैसे रोग भी हो सकते हैं।’ डा. प्रमेंद्र माहेश्वरी,
आजीवन कारावास तक है सजा
‘ एक्ट के अनुसार इस मामले कम से कम छह माह और अधिकतम आजीवन कारावास का प्रावधान है। इसके अलावा पांच लाख रुपये का जुर्माना भी ठोका जा सकता है।’
अजय जयसवाल, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी