नवास-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन व उनके असहाबों की अजीम शहादत के लिए याद किए जाने वाले माहे मोहर्रम का चांद दिखते ही मुस्लिम समाज में गम का माहौल छा गया। खास तौर से शिया मुसलमानों ने चांद रात से ही काले व सादे वस्त्र धारण कर लिए और शहीदाने करबला की याद में डूब गए। साथ ही महिलाओं ने भी जेवर आदि त्याग कर सादे लिबास धारण कर लिए। इमामबाड़ों में अलम सजाने के साथ ही मजलिसों मातम का दौर शुरू हो गया। रात में जुलूस भी निकाला गया।
मोहर्रम के सिलसिले में अंजुमन आल इंडिया गुलदस्ते हैदरी की ओर से गढै़या स्थित इमामबाड़ा वसी हैदर से और अंजुमन गुलदस्ते हैदरी की ओर से इमामबाड़ा आगा साहब से जुलूस-ए-अजा निकाले गए। इसमें शामिल लोग नौहा मातम करते हुए चले। जुलूस अपने निर्धारित रास्तों से होते हुए इमामबाड़ा मोहम्मद शाह पर पहुंचा। यहां अली जाफर नकवी की ओर से नज्र का खास एहतेमाम किया गया। इसमें समर अब्बास जैदी, हसनैन रजा आबदी, गुलरेज हुसैन जैदी, महमूद हसन, जमाल जैदी, डॉ. असद जैदी, हसीन रजा, एजाज अब्बास नकवी आदि शामिल हुए।
आज के कार्यक्रम
बरेली। शुक्रवार को पहली मजलिस गढै़या शिया चौक स्थित इमामबाड़ा मोहम्मद शाह पर आयोजित की जाएगी। इसे मौलाना कासिम जैदी खिताब करेंगे। दिन भर अलग-अलग इमामबाड़ों में मजलिसों का सिलसिला चलेगा।