सात महीने छह दिन पहले यूपी में प्रचंड बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी के योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेक र कई वादे किए थे। इनमें से कुछ पूरे हुए, कुछ अधूरे रहे लेकिन पार्टी संकल्प पत्र का कोई ठोस वादा अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। सिर्फ इतना हुआ है कि सीएम के आदेश पर कुछ दिन कर्मचारी नौ बजे दफ्तरों में आए, लेकिन अब फिर अपने पुराने ढर्रे पर हैं। कुछ बड़े अफसर जरूर दफ्तरों में सुबह नौ बजे आकर बैठ जाते हैं। कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा, गड्ढामुक्त सड़कें, शौचालय निर्माण, गरीबों को आवास, किसानों की ऋण माफी, भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था और पंचायतों में प्राथमिकता के आधार पर विकास कराने जैसे मुद्दों पर सरकार तुरंत एक्शन में आती दिखी। मगर, दो से तीन महीनों में ही पूरी व्यवस्था पुराने ढर्रे पर दिख रही है। न तो विकास योजनाओं में खास प्रगति दिख रही, न ही भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार माहौल बदलने में कामयाब हुई है। योगी सरकार के वादों की हकीकत पर प्रस्तुत है अमर उजाला की रिपोर्ट।
गड्ढामुक्त सड़कें : 60 फीसदी सड़कें अभी जर्जर
सीएम ने पीडब्ल्यूडी को 15 जून तक हर सड़क गड्ढामुक्त करने का फरमान जारी किया था। पीडब्ल्यूडी ने सामान्य नवीनीकरण में 306.72 किलोमीटर, विशेष मरम्मत में 188.35 किलोमीटर और गड्ढा मरम्मत में 888.34 किलोमीटर सड़कों को दुरुस्त करने का खाका बनाया। केवल गड्ढामुक्त सड़कों के लिए लगभग चार करोड़ का बजट मिला। सामान्य मरम्मत और नवीनीकरण के अलावा विशेष मरम्मत में चिह्नित मार्ग अभी भी जर्जर हैं। जो सड़कें गड्ढामुक्त हुई थीं, उनमें भी शहर से लेकर मुख्य मार्ग और ग्रामीण संपर्क मार्गों में अब गहरे गड्ढे हो चुके हैं।
शौचालय निर्माण : 90 फीसदी काम शुरू ही नहीं
स्वच्छ भारत मिशन के तहत जनपद में 2.04 लाख नये स्वच्छ शौचालय बनाकर वर्ष 2018 तक बरेली को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित करने का लक्ष्य है। पंचायत राज विभाग तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक 20 हजार शौचालय भी नहीं बनवा पाया है। मतलब, 90 फीसदी काम शुरू ही नहीं हो पाया। क्यारा ब्लाक को 25 अक्तूबर तक ओडीएफ करने की प्रशासन की घोषणा भी हवाई साबित हुई। दो माह पहले पंचायत राज विभाग के डायरेक्टर ने विभागीय अफसरों को एक हजार शौचालय प्रतिदिन निर्माण कराने का लक्ष्य सौंपा था। यह लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पा रहा है। अगर कामों की प्रगति का यही हाल रहा तो तय समय पर बरेली का ओडीएफ घोषित होना मुश्किल हो जाएगा।
गरीबों के आवास : अब तक शुरूआत नहीं
योगी सरकार ने पूर्ववर्ती सरकारों की इंदिरा आवास, लोहिया आवास आदि योजनाएं बंद कर सबको प्रधानमंत्री आवास योजना में समाहित कर दिया। वर्ष 2016-17 में ग्रामीण क्षेत्र में 57 सौ आवास बनाने के लिए पात्रों का चयन कर प्रत्येक के खाते में 1.20 लाख रुपये देने का लक्ष्य रखा गया। इसमें 15 सौ लाभार्थी भी लाभान्वित नहीं हो पाए। बड़ी संख्या में अपात्रों का चयन कर लिया गया। वर्ष 2017-18 में यह लक्ष्य घटाकर 37 सौ आवासों का कर दिया गया। लचर प्रशासनिक व्यवस्था के चलते अब तक लाभार्थी चयन की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पाई है। ग्राम पंचायत से ब्लाक और जनपद मुख्यालय तक सब कुछ हवा-हवाई है। गरीब सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने का मजबूर हैं।
ऋण मोचन : 60 फीसदी किसान इंतजार में
सरकार की प्राथमिकता वाली इस योजना में 1.48 लाख किसान चयनित किए गए थे। तीन चरणों में 63 हजार किसानों के 387 करोड़ का ऋण माफ हो पाया है। 85 सौ किसानों का कृषि विभाग सत्यापन नहीं कर पाया। बताया जाता है कि पात्रों के चयन में बड़ी संख्या में मृतक और लापता किसानों का डाटा ऑनलाइन फीड कर दिया गया। इनकी संख्या दो हजार से ज्यादा बताई जा रही है। इनमें भी तमाम किसानों को अठन्नी और चवन्नी के चेक दे दिए गए। इसे लेकर सरकार की खूब फजीहत भी हुई। ऋण माफी की सूची में शामिल कुछ किसान मौके पर ढूंढे नहीं मिल रहे। जिला कृषि अधिकारी डॉ. रामतेज यादव का कहना है कि इन किसानों के सत्यापन के लिए टीम लगाई गई है। नवंबर तक चौथे चरण में किसानों के खाते में ऋण मोचन की राशि भेज दी जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाएं : स्टाफ न संसाधन
जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट दिसंबर 2016 में शुरू होनी थी, लेकिन अभी काम बंद है। दवाआें की कमी भी लगातार बनी हुई है। आईसीयू के लिए जरूर वेंटिलेटर भेज दिए गए हैं लेकिन इन्हें शुरू नहीं किया गया है। सौ बेड के मैटरनिटी विंग में भी स्टाफ की तैनाती होना बाकी है। डॉक्टर और स्टाफ के रवैये में भी खास बदलाव नहीं आया है। मरीजों के इलाज में डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही और अव्यवस्थाओं पर भाजपा की महानगर इकाई के नेताओं से मारपीट तक की नौबत आ गई थी। हाल ही में दर्द से तड़प रहे मरीज का इलाज न करने पर बिथरी से भाजपा विधायक राजेश मिश्रा पप्पू भरतौल को रात में जिला अस्पताल जाना पड़ा, लेकिन समय पर इलाज न मिलने से मरीज की मौत हो गई।
24 घंटे बिजली भूल जाएं : 80 फीसदी काम लटके
शहर में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली लोकल फाल्ट की वजह से बिजली वादे के मुताबिक नहीं मिल पा रही है। जर्जर बिजली लाइनें भी साथ नहीं दे पा रहीं। किसानों को भी फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही। बिजली बिल वसूलने से लेकर नये कनेक्शन देने में इंजीनियर और कर्मचारियों की अवैध वसूली किसी से छुपी नहीं है। पावर कारपोरेशन के 40 में 30 काम अभी अधर में लटके हैं। सब स्टेशन और लाइनें बिछाने के 30 कामों में 80 फीसदी काम सामान और फंड न मिलने से पूरा नहीं हुआ है। शहर की स्थिति भी दयनीय हे। पोस्टमार्टम हाउस के पास पावर हाउस की बिल्डिंग खड़ी हो गई, मगर, उपकरणों के नाम पर अभी कुछ नहीं हुआ। आने वाली गर्मियां भी बुरी बीतने जा रही हैं।
नहीं चालू हो पाया सॉलिड वेस्ट मैैनेजमेंट प्लांट
जून की मंडलीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने नगर निगम के अफसरों को दो माह के अंदर हर तरह की अड़चनें दूर कर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट चालू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। नगर निगम ने 36 करोड़ के कामों को आचार संहिता लागू होने से पहले शुरू करा दिया। ये काम एक साल से भी ज्यादा समय से रुके पड़े थे। चार महीने बाद भी न तो प्लांट चालू हो पाया और न ही कूड़ा निस्तारण की समस्या का समाधान हुआ। अस्पतालों के मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए लगे सिनर्जी वेस्ट प्लांट में से भी एक ही चल रहा है जबकि दूसरा लंबे समय से बंद पड़ा है। मानक पूरे न करने पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने इस प्लांट को चलाने के लिए एनओसी नहीं दी।
अब नजर नहीं आती एंटी रोमियो स्क्वाड
योगी सरकार की प्राथमिकताओं में कानून व्यवस्था भी रही। पुलिस को मिली खुली छूट का नतीजा यह हुआ कि बरेली जोन में हुई आठ पुलिस मुठभेड़ में 13 कुख्यात बदमाशों को जेल भेजा गया। करीब साढ़े तीन सौ वांछित बदमाशों को भी सलाखों के पीछे भेजा गया। हालांकि थाने स्तर पर गठित एंटी रोमियो स्क्वाड टीमें अब सजावटी बनकर रह गई हैं। मौजूदा समय में स्कूल और कॉलेजों के पास यह टीमें नजर नहीं आती। एसएसपी कार्यालय में शुरू हुए एफआईआर काउंटर भी सही से काम नहीं कर रहे हैं। फरियादियों के शिकायती पत्रों पर एफआईआर के निर्देश होने के बाद भी संबंधित थानों को मामले रेफर किए जा रहे हैं। हालांकि छह महीने के रिकार्ड पर नजर डालें तो लूट, डकैती, हत्या, दुष्कर्म जैसे संगीन अपराधों में गिरावट आई है।