बरेली की अर्थव्यवस्था में तेजी से बदलाव हो रहा है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि जिले की आर्थिक वृद्धि अब पारंपरिक कृषि पर कम और सेवा क्षेत्र पर ज्यादा निर्भर हो गई है। जिले के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सेवा क्षेत्र की सर्वाधिक हिस्सेदारी है। कृषि की हिस्सेदारी में गिरावट आई है, जबकि उद्योग क्षेत्र में सीमित बढ़ोतरी हुई है। राहत की बात यह है कि जिले के सकल घरेलू उत्पाद और प्रति व्यक्ति आय दोनों में चार वर्षों से लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
वर्ष 2021-22 में प्रति व्यक्ति आय 76,771, 2022-23 में 82,776, 2023-24 में 95,018 रुपये थी। वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 1,04,314 रुपये हो गई है। यह स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में विस्तार का संकेत है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आय में यह बढ़ोतरी सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच रही है।
जिले में व्यापार, परिवहन, होटल, संचार और अन्य सेवाएं तेजी से विस्तार कर रही हैं। वर्ष 2024-25 में होटल व जलपान गृह से 4,102 करोड़ रुपये की आय हुई। इससे जिले की जीडीपी में 6.83 फीसदी योगदान हुआ। परिवहन व संचार से 5,038 करोड़ की आय हुई। जीडीपी में इसकी 8.39 फीसदी भागीदारी रही। शहरीकरण और उपभोक्ता गतिविधियों में बढ़ोतरी इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है। जिले में शहरी आबादी करीब 20 लाख है। रोजगार के नए अवसर भी इसी क्षेत्र में ज्यादा सृजित हो रहे हैं।
जिले में गन्ना, धान और गेहूं जैसी फसलों के बावजूद कुल आर्थिक योगदान में कृषि क्षेत्र पीछे छूट रहा है। कृषि, पशुधन, वानिकी एवं मत्स्य पालन के आकड़ों पर गौर करें तो दो साल में आय में मामूली बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2023-24 में इस क्षेत्र से 12553 करोड़ की आय हुई थी। वर्ष 2024-25 में 3.5 फीसदी वृद्धि के साथ 12,954 करोड़ रुपये की आय हुई।
अपेक्षा के अनुसार नहीं हो रहा औद्योगिक विकास
जिले का औद्योगिक विकास अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। छोटे और मझोले उद्योगों की संख्या सीमित है और रोजगार सृजन भी कम हो रहा है। निवेश और आधारभूत ढांचे की कमी के कारण उद्योग क्षेत्र अब भी पिछड़ा हुआ है। यही वजह है कि जिले की अर्थव्यवस्था में संतुलन नहीं बन पा रहा। वर्ष 2023-24 में विनिर्माण क्षेत्र में 782 करोड़ की आय हुई थी। वर्ष 2024-25 में 14.9 फीसदी वृद्धि के साथ 898 करोड़ की आय हुई है।
विकसित हो रहा जिला
सेवा क्षेत्र में बढ़ोतरी का मतलब जिला विकासशील से विकसित होने की ओर बढ़ रहा है। कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी घटना चिंताजनक है। इससे संकेत मिलता है कि हम आयात की तरफ निर्भर हो रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्र में अपेक्षाकृत वृद्धि न होने के कारण कोरोना व पश्चिम एशिया युद्ध को भी माना जाएगा। - प्रो. शिखा वर्मा, अर्थशास्त्र विभाग, बरेली कॉलेज