बरेली। शाहजहांपुर में चालक की मौत के मामले को रोडवेज के अफसर आठ घंटे तक दबाए रखे। खुद खलीफा बनने के चक्कर में जिले के आलाधिकारियों तक को मामले की जानकारी नहीं दी। यही कारण रहा कि मांग पूरी करने का आश्वासन देकर जो हंगामा कुछ देर में शांत कराया जा सकता था, वह कई घंटे तक चलता रहा।
दोपहर करीब एक बजे लखनऊ से मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजय प्रधान ने जब जिलाधिकारी अविनाश सिंह को कॉल की तो उन्होंने रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंध मोहम्मद अजीम, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक एके बाजपेई, एआरएम फाइनेंस राम अग्रवाल, ओएजी-फर्स्ट निर्भय वर्मा व जगमोहन यादव को तलब कर लिया। फटकारने के साथ ही कार्रवाई तक की चेतावनी दे डाली।
डीएम ने मृत चालक प्रमोद कुमार के पिता शिशुपाल से बात की तो वह फफक पड़े। डीएम ने उनको ढांढस बंधाते हुए साढ़े सात लाख रुपये मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। कहा कि मृतक आश्रित को संविदा पर नौकरी दिलाने के लिए मुख्यालय को पत्र भेजा जा रहा है। वहां से आदेश मिलने के बाद कार्रवाई पूरी की जाएगी।
आप लोगों में क्या संवेदना मर गई है... समय पर सूचना क्यों नहीं दी
डीएम ने परिवहन निगम के अफसरों से कहा कि इतनी बड़ी घटना में इस हद तक चूक... मामले को दबाए बैठे रहे। आप लोगों में क्या संवेदना मर गई है, आखिर समय पर सूचना क्यों नहीं दी? अफसर सिर्फ सुनते रहे। आरएम और एआरएम ने नियमों का हवाला देते हुए आश्रित कोटे में नौकरी देने को लेकर गोलमोल बात की तो डीएम ने नाराजगी जताई। कहा कि मुझे नियमों का जानकारी मत दो, सिर्फ इतना बताओ कि पीड़ित को न्याय कैसे मिलेगा? आखिर में निगम ने जल्द कार्रवाई पूरी करने की बात कही।
कोट
सूचना देने में परिवहन निगम के अफसरों ने लापरवाही बरती। आरएम, एआरएम को बुलाकर कार्रवाई के बारे में जानकारी ली गई। निर्देश दिए हैं कि मृतक आश्रित को संविदा नौकरी जल्द दिलाई जाए। मुआवजे के साथ दो भी देयक हैं, उनका भी भुगतान शीघ्र कराएं। इसमें लापरवाही बरतने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। - अविनाश सिंह, जिलाधिकारी