बजट से उम्मीदें : वरिष्ठ नागरिकों ने कहा- आयुष्मान से इलाज में डॉक्टर बनाते हैं मनमाना बजट, निगरानी जरूरी
बरेली। वरिष्ठ नागरिकों का बड़ा आर्थिक दबाव मेडिकल खर्च है। जो उम्र के साथ बढ़ता भी है। सरकार ने आयुष्मान कार्ड बनाएं हैं पर डॉक्टर मनमाना बजट बनाते हैं। इससे पांच लाख कम पड़ जाते हैं। आयकर सीमा से मिली छूट नाकाफी है, इससे निजात दिलाई जाए।
इस मायूसी से उभरने के लिए वरिष्ठ नागरिकों को केंद्र सरकार के फरवरी में प्रस्तावित आम बजट से खासी उम्मीदें हैं। वरिष्ठ नागरिक कल्याण सोसायटी के पदाधिकारियों का तर्क है कि वरिष्ठ नागरिकों को निर्धारित इलाज की दर और अस्पताल में ही इलाज की अड़चन से निजात मिलनी चाहिए।
पांच लाख रुपये तक का इलाज कम है और अस्पताल निर्धारित होने से वहां तक पहुंच पाना मुमकिन नहीं होता। वह दूसरों के सहारे होते हैं, इसलिए आयुष्मान कार्ड के बजाय सरकार सीधे निजी अस्पताल में ही भुगतान की व्यवस्था करे ताकि बेहतर इलाज मिल सके। ब्यूरो
10 हजार तक का इलाज आयुष्मान
से कराने पर 50 हजार पहुंचता है
वरिष्ठ नागरिक कल्याण सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र कुमार सक्सेना ने बताया कि बुजुर्गों की जांच के नाम पर डॉक्टर पहले काफी नकद रुपये जमा करा लेते हैं। भर्ती होने पर आयुष्मान कार्ड लगाते हैं। मोतियाबिंद का इलाज जो नकद भुगतान से 10 हजार में हो जाता है, आयुष्मान कार्ड से इलाज पर डॉक्टर 50 हजार बिल बनाकर सरकार से वसूलते हैं। इससे न सरकार की मंशा पूरी होती है न ही बुजुर्ग का बेहतर इलाज होता है। सरकार को बुजुर्गों के इलाज के साथ ही निगरानी की भी व्यवस्था करनी चाहिए ताकि निजी अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश लगे।
वरिष्ठ और सुपर सीनियर सिटीजन
के लिए अलग टैक्स स्लैब जरूरी
शहर निवासी भीम सेन भाटिया के मुताबिक, पिछले वर्ष लागू नए टैक्स स्लैब सिस्टम में कई पारंपरिक छूट और कटौतियां हटाने के बाद इसका सीधा असर वरिष्ठ नागरिकों पर पड़ा है। इसलिए अलग टैक्स स्लैब की जरूरत है। बेसिक एग्जेंपशन लिमिट बढ़े, मेडिकल खर्च और हेल्थ इंश्योरेंस पर अतिरिक्त टैक्स कटौती, नए टैक्स सिस्टम में उम्र आधारित राहत की वापसी होनी चाहिए। इसके अलावा रेलवे, बस से यात्रा किराया में भी रियायत मिलनी चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था भी हो ताकि आपात स्थिति में मदद मिल सके।