24 साल पहले हुआ था अपहरण
दिनेश ने बताया कि वर्ष 2001 में डकैत गिरोह सक्रिय थे। तब धनपाल का अपहरण कर लिया गया था, लेकिन बाद में वह छूट गए थे। धनपाल पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। धनपाल की पत्नी ममता और तीन बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। दिनेश ने बताया कि उन्हें रतौंधी की भी बीमारी थी।
जमीन को लेकर चल रहा था विवाद
परिजनों ने बताया कि वर्ष 2022 में धनपाल व उनके भाइयों ने अपनी 51 बीघा जमीन को बदायूं जिले के मूसाझाग निवासी कुछ लोगों को बेचा था। संबंधित लोगों ने बयाने में 4.50 लाख रुपये दिए थे, लेकिन तय समय पर जमीन नहीं ली। इसके बाद खरीदार बयाना वापस मांग रहे थे।
धनपाल व उनके भाइयों ने इसे नियम विरुद्ध बताकर वापस नहीं किया था। इसके लिए वह लोग लगातार दबाव डाल रहे थे। उन्होंने दो दिन पहले पुलिस को तहरीर भी दी थी। बताया कि एक वर्ष पहले धनपाल के पिता ने वह जमीन फतेहगंज पूर्वी के एक व्यक्ति को बेच दी थी। उसकी रकम से उन लोगों ने शाहजहांपुर के बंडा में जमीन खरीद ली। उन्हें लगता है कि उसी रंजिश में उन लोगों ने धनपाल
की हत्या कर दी।
छुट्टा पशु के हमले में दो लोगों की हो चुकी है मौत
ग्रामीणों का कहना है कि एक सांड़ गांव के आसपास घूमता है। दो वर्ष पहले उसने गांव की सुमित्रा देवी पर हमला कर उनकी जान ले ली थी। वर्ष 2024 में गांव निवासी मोहर सिंह को भी उसी सांड़ ने हमला कर घायल कर दिया था, उनकी भी मौत हो गई थी। फॉरेंसिक टीम ने सोमवार को घटनास्थल पर जो जांच की, उसमें भी सांड़ के हमले जैसी स्थिति से इन्कार नहीं किया।
एसपी दक्षिणी अंशिका वर्मा ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया है। जांच के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट होगा। चार टीमें गठित की गई हैं। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।