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वैक्सीन के शोध में पशुओं के इस्तेमाल पर वैज्ञानिक चिंतित

Tue, 05 Dec 2017 01:33 AM IST
बरेली।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई वैक्सीन के लिए होने वाले शोधों में पशुओं के प्रयोग को लेकर वैज्ञानिक चिंतित हैं। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में इसे लेकर वैक्सीन के उत्पादक, निर्यातक और गुणवत्ता नियंत्रकों की चतुर्थ वार्षिक बैठक हुई। बैठक में वैक्सीन पर शोध के लिए दूसरे विकल्प विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया गया। वैज्ञानिकों ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए वैक्सीन के दाम भी कम किए जाने चाहिए।
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जैविक मानकीकरण विभाग में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. एके तिवारी ने बैठक के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इंडियन फेडरेशन ऑफ एनिमल हेल्थ के वाइस प्रेसीडेंट डॉ. डीके डे ने कहा, किसानों की आय दोगुनी करने के लिए पशु रोगों की निरंतर निगरानी और नई बीमारियों पर शोध जरूरी है। टीकों की गुणवत्ता नियंत्रक कंपनी के अधिकारी एवं पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ. ऋषेंद्र वर्मा ने नियंत्रण संबंधी नियमों की जानकारी दी। डॉ. आरपी मिश्र ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैक्सीन पर शोेधों में पशुओं का इस्तेमाल कम करने को लेकर मुहिम चल रही है। अपने देश में भी इसका विकल्प तलाशना जरूरी है। इस दौरान जनवरी, 2018 से लागू होने वाले इंडियन फार्मकोपिया के नए प्रोटोकॉल पर भी चर्चा की गई। संस्थान के निदेशक डॉ. आरके सिंह ने टीकों का मूल्य कम करने, पशुओं का इस्तेमाल किए बिना वैक्सीन जांच की विधि विकसित करने, जांच का समय, सामग्री घटाने और अधिक दिन तक रखे जाने योग्य टीके विकसित करने पर जोर दिया। विभाग के डॉ. एबी पांडेय, डॉ. पी धर, डॉ. मयंक रावत आदि ने प्रतिनिधियों की शंकाओं का समाधान किया।
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