स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान हैं। अगर कुछ बच्चों ने अभी सिलेबस नहीं खरीदा है तो उन्हें फीस बुक नहीं दी गई है और फीस जमा कराने पर जोर दिया जा रहा है। फीस अध्यादेश से राहत मिलने के इंतजार में अभिभावक फीस जमा करने से बच रहे हैं। अमर उजाला की हेल्पलाइन पर शिकायतें कर रहे अभिभावकों का कहना है कि अगर फीस जमा कर दी तो कम होने पर स्कूल वापस नहीं करेंगे।
कोहाड़ापीर निवासी महिला ने बताया कि उनके दो बच्च सैदपुर हाकिन्स स्थित स्कूल में कक्षा नौ और छह में पढ़ते हैं। फीस जमा करने की अंतिम तारीख 15 अप्रैल हैै। दोनों बच्चों की साल भर की फीस ही 82 हजार रुपये है। किताबें और ड्रेस आदि का खर्च अलग है। अपना अंदेशा जताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार फीस कम करने की बात कर रही है और स्कूल फीस जमा करने का दबाव बना रहा है। इसके बाद अगर फीस कम हो गई तो स्कूल इसे वापस नहीं करेंगे और किसी न किसी तरह से हड़प कर लेंगे।
ढाई सौ रुपये की स्कूल मैगजीन लेना अनिवार्य
स्कूल संचालक अभिभावकों पर तरह-तरह के खर्च डाल रहे हैं। नैनीताल रोड स्थित एक स्कूल की शिकायत करते हुए अभिभावक ने कहा कि उनका बच्चा कक्षा चार में पढ़ता है। 33 हजार रुपये फीस है। इसके बावजूद हर बच्चे को स्कूल की मैगजीन लेना अनिवार्य है, जिसकी कीमत ढाई सौ रुपये है। बताइए उस मैगजीन का बच्चे की पढ़ाई से क्या वास्ता है।
साल भर की फीस में बढ़ाए 15 हजार
एक अभिभावक ने हेल्पलाइन पर बताया कि पीलीभीत बाईपास स्थित स्कूल में उनका बच्चा कक्षा छह का छात्र है। बताया कि स्कूल ने हर तिमाही 3750 रुपये फीस बढ़ा दी है। इस तरह साल भर की फीस में 15 हजार रुपये की बढ़ोत्तरी हो गई जबकि सरकार फीस कम कराने की बात कर रही है। फीस जमा करने की अंतिम तारीख भी दस अप्रैल थी लेकिन वह कार्रवाई के इंतजार में रुके हुए हैं।
मनमानी के विरोध में सड़क पर उतरेगा महिला जागृति मंच
स्कूल प्रबंधकों की मनमानी का विरोध अब सड़क पर भी होगा। महिला जागृति मंच की अध्यक्ष डॉ. मनु नीरज ने बताया कि शुक्रवार को उनके संगठन के लोग सुबह 11 बजे चौकी चौराहे से कलेक्ट्रेट तक पुस्तक विक्रेताओं एवं स्कूलों प्रबंधकों की मनमानी के खिलाफ विरोध करेंगे। इसके बाद अभिभावकों एवं बच्चों की समस्याओं के संबंध में डीएम को ज्ञापन दिया जाएगा। इसके अलावा पैगामे इमाम हुसैन संस्था की ओर से भी इस संबंध में दोपहर 12 बजे डीएम को ज्ञापन सौंपा जाएगा।