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Bareilly News: 'मौत' की पाठशाला... खतरे में मासूम

Wed, 10 May 2023 02:41 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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बरेली। विद्यार्थियों को परिषदीय स्कूलों में लाने के लिए सरकारें करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं। जो बच्चे पढ़ रहे है उनको भी सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जा रही है। 80 से ज्यादा स्कूल जर्जर भवनों में चल रहे हैं। किराए की जर्जर इमारतों में चल रहे विद्यालयों को शिफ्ट करने के आदेश के बाद भी अब तक सात स्कूलों को शिफ्ट नहीं किया गया है। स्कूलों की जर्जर इमारतें बच्चों की जान पर बड़ा खतरा बन सकती हैं। पिछले साल की बारिश में कई स्कूलों की इमारतें गिर चुकी हैं। इस साल भी कई इमारतों पर यह खतरा मंडरा रहा है।
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पिछले वर्ष गिर चुका है बरामदा
प्राथमिक विद्यालय साहूकारा किराए के जर्जर भवन में चल रहा है। स्कूल में एक ही कमरे में पांच कक्षाओं के 105 बच्चों को जमीन में बैठाकर कक्षाएं लगाई जा रही हैं, स्कूल का बाकी हिस्सा गिर चुका है। प्रधानाध्यापिका शकुंतला ने बताया कि स्कूल का बरामदा पिछले साल गिर चुका है। बारिश के दौरान कमरों में पानी टपकता है, साल 2022 में बारिश के दौरान स्कूल के सभी दस्तावेज खराब हो गए थे। बारिश में स्कूल में क्लास लगाना बच्चों की जान से खिलवाड़ करने जैसा है। लकड़ी की बल्लियों पर बने लिंटर में से छोटी ईंट झड़कर गिर चुकी है। विभाग को कई बार विद्यालय की स्थिति के फोटो मुहैया करा चुके हैं।
दोबारा नहीं किया गया निर्माण

रामलीला ग्राउंड स्थित प्राथमिक विद्यालय सुभाषनगर में एक ही कमरे में पांच क्लास के बच्चों को बैठाकर कक्षाएं लगाई जा रही हैं, विद्यालय का बाकी हिस्सा काफी जर्जर होने की वजह से करीब साल भर पहले ध्वस्त कर दिया गया था। अब तक दोबारा निर्माण नहीं किया गया है। फर्नीचर और बाउंड्रीवॉल भी नहीं है। विभाग नामांकन बढ़ाने पर जोर दे रहा है, लेकिन स्कूल की बदहाली के चलते छात्र संख्या दिनों दिन कम हो रही है। प्रधानाचार्य बिंदू गंगवार ने बताया कि हमारे पास बच्चों को बैठाने की जगह नहीं है, स्कूल में बाउंड्रीवॉल नहीं है, बाहरी लोग कूड़ा डालते हैं। नामांकन बढ़ाकर हम उन्हें कहां बैठाएंगे? अभिभावक बच्चों को इस स्कूल में भेजना नहीं चाहते।
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स्कूल में बना है सिर्फ एक ही शौचालय
प्राथमिक विद्यालय खलीलपुर की शिक्षिका सत्यवती ने बताया कि साल 2015 में विद्यालय का एक कमरा गिर गया था, उसके बाद से अभिभावकों ने विद्यालय से दूरी बनानी शुरु कर दी। वर्तमान में स्कूल में बाउंड्रीवॉल नहीं है। एक ही शौचालय है। स्कूल में केवल 36 बच्चे ही रह गए हैं। विद्यालय में एक कमरा अपना और एक कमरा डूडा से मिला हुआ है। विद्यालय नगर निगम की देखरेख में है। हालांकि कायाकल्प की मदद से मरम्मत कराई गई है। विधायक निधि से स्कूल को फर्नीचर भी मिला है और जलजीवन मिशन के तहत स्कूल में सबमर्सिबल पंप की व्यवस्था कराई गई है।

महानिदेशक ने मांगा था जवाब
28 अप्रैल को महानिदेशक बेसिक शिक्षा विजय किरन आनंद ने जर्जर स्कूलों की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी थी। इसमें विभाग की ओर से जानकारी दी गई थी कि 80 से अधिक विद्यालय जर्जर अवस्था में हैं। नगर क्षेत्र के सात विद्यालय अब भी किराए की जर्जर इमारतों में चल रहे हैं। हालांकि साल 2022 तक करीब 35 जर्जर विद्यालयों की इमारत ध्वस्त की गई, लेकिन पुनर्निर्माण का काम अब तक बजट की कमी के चलते अटका पड़ा है।
मरम्मत और निर्माण कराया जाएगा
कायाकल्प के तहत विद्यालयों का चयन करके मरम्मत और निर्माण कार्य कराया जाएगा। किराए की जर्जर इमारतों में चल रहे ज्यादातर विद्यालयों को नजदीकी स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया है। - विनय कुमार, बीएसए
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