बरेली। तीन महीनों से बेसिक स्कूल के बच्चों की ड्रेस के लिए उपयुक्त कपड़ा खोजने में नाकाम रहे खंड शिक्षा अधिकारियों का वेतन क्या रुका, उन्होंने मानकों के अनुरूप कपड़ा खोज निकाला। अब जल्द ही स्वयं सहायता समूह और दूसरी कार्यदायी फर्मों से ड्रेस बनवाकर महीने भर से पहले ही उसे बच्चों को मुहैया करा दिए जाने का भी दावा किया जा रहा है। कार्रवाई होते ही कपड़ा खोज लेने का दावा करने पर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग रहा है।
पिछले दिनों परिषदीय स्कूलों में ड्रेस वितरण के बाबत ‘असली’ वाले सैंपल का इंतजार कर रहे बीईओ के अगस्त का वेतन बीएसए ने रोक दिया था। आदेश जारी होते ही बेसिक शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। मानकों के अनुसार कपड़ा खोजने में खुद ही असमर्थता जता रहे बीईओ ने अब कार्रवाई के तत्काल बाद आननफानन में कपड़ा मिलने की बात कही है। साथ ही कपड़ा का सैंपल टैक्सटाइल इंजीनियर की टेक्निकल जांच में भी पास होने की बात कही है।
अफसरों की ओर से अचानक किया गया ये दावा विभाग के ही कई कर्मचारियों और शिक्षक संगठनों में चर्चा का विषय बन गया है। सूत्रों के मुताबिक बीएसए के जारी आदेश में अगस्त का वेतन पूरी तरह रोकने के आदेश हैं, जिसे जारी कराने के लिए बीईओ मुस्तैदी क ा परिचय देना चाहते हैं, लेकिन उनकी यही मुस्तैदी अब सवालों के घेरे में है। क्योंकि अगर कार्रवाई के छह दिन बाद कपड़ा मिल गया तो पहले क्यों नहीं खोजा गया। करीब तीन लाख से ज्यादा परिषदीय स्कूलों के बच्चों की नाप के अनुसार प्रत्येक को दो ड्रेस (शर्ट, पैंट) निर्माण और उसका वितरण कैसे होगा?
जहां हुआ वितरण वहीं से आया कपड़ा
अधिकारियों का कहना है कि सूबे के लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर व अन्य जिलों में मानकों के अनुसार कपड़ा मिला है। संभावना जताई है कि गुणवत्ता की जांच में पास हुए कपड़े कार्यदायी फर्म और स्वयं सहायता समूह कपड़ा इन जिलों से लेकर आए हैं। जो यहां भी सैंपल में पास हो गए हैं। यहां सवाल है कि माह भर पहले ही जब वहां कपड़े का सैंपल पास हो गया था तो इतने दिनों तक इंतजार क्यों करते रहे?
कहीं डंप माल खपाने की तैयारी तो नहीं
सूत्रों के मुताबिक करीब तीन माह पहले ड्रेस निर्माण और वितरण का आदेश जारी होने के साथ ही, हजारों की संख्या में अमानक ड्रेस निर्माण कर वितरण की तैयारी थी। इस बाबत शिक्षक संगठनों ने विरोध किया और मामला शासन तक पहुंचा तो शासन ने अमानक ड्रेस वितरण पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। लिहाजा, कार्रवाई के डर से माल डंप कर दिया। सूत्रों के मुताबिक अब यह डंप माल गुणवत्ता वाले कपड़ों के बीच में रखकर खपाया जाएगा।
मानकों के अनुसार कपड़ा नहीं मिला इसलिए ड्रेस निर्माण और वितरण नहीं हो सका और कार्रवाई हुई। अब कई कपड़ों का सैंपल टेक्निकल जांच में पास हो गया है, जल्द ही ड्रेस निर्माण और वितरण कार्य पूरा किया जाएगा।
- राजीव श्रीवास्तव, बीइओ
शासनादेश के तहत मानकोें के अनुसार जांच में पास कपड़े से ड्रेस निर्माण कराया जाना है। पिछले दिनों क पड़ों के कई सैंपल पास हो गए हैं, अब उनसे ड्रेस का निर्माण कार्य पूरा कराकर स्कूलों में ड्रेस वितरण कराया जाएगा।
- रमेश चंद्रा, बीईओ