बरेली। तहसीलों में एक साल के बाद दूसरी साल में दो गुनी आय के प्रमाणपत्र जारी करने का फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। अधिकांश परिवारों की आमदनी के वास्तविक प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में जरुरतमंद छात्रों को छात्रवृत्ति और शुल्क क्षतिपूर्ति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि जुगाड़ से अधिक आमदनी वाले परिवार कम आय के प्रमाणपत्र बनवाकर अपने बच्चों के नाम से छात्रवृत्ति और शुल्क क्षतिपूर्ति ले रहे हैं।
यह खुलासा प्रमुख सचिव (समाज कल्याण) सुनील कुमार ने यहां के आधा दर्जन शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों का ब्योरा डीएम को भेजकर किया है। उनका कहना है कि 2013-14 में जो आय थी, उसे 2014-15 में बढ़ाकर दो गुना से चार गुना तक कर दिया गया। इस ब्योरे के आधार पर जांच कराकर तहसील के दोषी लेखपाल और तहसीलदारों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक माह के अंदर रिपोर्ट भेजें। साथ में इस तरह के फर्जीवाड़े को रोकने के बारे में भी निर्देश जारी किए जाएं।
ये हैं मामले
सिद्ध विनायक से बीटेक कर रहे रजनीश के परिवार की आय 30 हजार रुपये सालाना से बढ़ाकर 1,62,960 रुपये कर दिया गया। इस छात्र के परिवार की आय में 1,32,960 रुपये की बढ़ोत्तरी दिखा दी गई। इसी तरह खंडेलवाल कालेज से बीसीए करने वाले अभिषेक कुमार के परिवार की आमदनी एक साल में 1,22,400 रुपये बढ़ा दी गई । बरेली कालेज से बीएससी कर रहे हेमंत कुमार के परिवार की आमदनी 1,10,000 रुपये। एसआरएमएस से बीटेक कर रहे दिव्य कुशवाहा के परिवार की आमदनी 1,08,000 रुपये प्रति साल बढ़ा दी है। बीए कर रहे उत्क र्ष के परिवार की आमदनी 96,000 रुपये, बीएड कर रही रानी मौर्या के परिवार की आमदनी 96,000, बीटेक कर रहे उत्कर्ष रस्तोगी के परिवार की आमदनी 90,000 तथा बीसीए कर रहे देवेंद्र के परिवार की आमदनी 73,359 रुपये बढ़ा दी गई।