पत्नी से विवाद पड़ गया भारी
एडीएम सिटी सौरभ दुबे ने केंद्रपाल का जाति प्रमाणपत्र निरस्त किए जाने की सूचना बुलंदशहर के डीआईओएस को दे दी है। उधर, बुलंदशहर के डीआईओएस ने बताया कि केंद्रपाल ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एससी कोटे में नौकरी पाई है। उसकी बर्खास्तगी, एफआईआर और वेतन वसूली की कार्रवाई करेंगे। हरियाणा के सोनीपत निवासी पत्नी से विवाद केंद्रपाल पर भारी पड़ गया।
बहेड़ी तहसीलदार ने की थी प्रारंभिक जांच
पत्नी ने केंद्रपाल के खिलाफ 31 मई को बुलंदशहर के डीआईओएस और 10 जून को डीएम से शिकायत की थी। केंद्रपाल बहेड़ी तहसील के गांव दौलतपुर का मूल निवासी है और उसने धनगर जाति का प्रमाणपत्र सदर तहसील के जागृति नगर करगैना के पते पर बनवाया था। इसलिए मामले की प्रारंभिक जांच बहेड़ी तहसीलदार ने की थी। इसमें उसके गड़रिया जाति के होने की पुष्टि हुई थी। इस पर जिला प्रशासन ने नोटिस जारी कर 28 अगस्त को उसे तलब किया था। उधर, बुलंदशहर के अपर शिक्षा निदेशक अजय कुमार द्विवेदी ने केंद्रपाल को निलंबित कर डीआईओएस ऑफिस से संबद्ध कर दिया था।
23 अक्टूबर 2020 को पाई थी नौकरी
केंद्रपाल उप्र अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) पुरुष शाखा में सहायक अध्यापक (अंग्रेजी) पद पर बुलंदशहर में 23 अक्टूबर 2020 को नियुक्त हुआ था। वहां उसे पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज रसूलगढ़ में तैनाती मिली थी। फिर उसके विवाद के चलते वर्ष 2021 में उसे राजकीय हाईस्कूल बदरखा सीरवास से संबद्ध किया गया था।
केंद्रपाल का जाति प्रमाणपत्र निरस्त किए जाने संबंधी आदेश अभी मिला नहीं है। यह दस्तावेज मिलते ही उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराएंगे। बर्खास्तगी के साथ ही वेतन की वसूली भी सुनिश्चित करेंगे। फिलहाल, वह निलंबन के बाद से लापता है। - विनय कुमार, डीआईओएस, बुलंदशहर