पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन में गंदगी का सफाया तो नहीं हो पा रहा लेकिन करोड़ों रुपये का बजट जरूर साफ किया जा रहा है। मिशन पूरा होने में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि शौचालय के निर्माण के लिए दिए जा रहे 12 हजार रुपये के अनुदान पर अफसरों से लेकर ग्राम प्रधान तक सभी की नजर लगी हुई है। यह पैसा अगर प्रधान और सेक्रेटरी को दिया जाए तो वे खराब ईंट और कम सीमेंट लगाकर घटिया निर्माण करा दे रहे हैं। अधिकारी लाभार्थी को यह रकम इसलिए नहीं देना चाहते क्योंकि उन्हें शक है कि लाभार्थी इसे टॉयलेट बनाने में खर्च ही नहीं करेगा। बहरहाल दोनों ही हालत में मिशन की रकम को चूना लग रहा है। यही वजह है कि जिले को ओडीएफ बनाने का अभियान अधर में लटक गया है।
जिले को अक्तूबर तक खुले में शौच मुक्त करना है। इसके लिए मुहिम तो चलाई जा रही हैं, लेकिन वह अपने मुकाम तक पहुंचने से पहले ही फुस्स हो रही है। अभियान के असफल होने की कई वजह सामने आ रही है। दरअसल पंचायत राज विभाग शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार की मदद दो तरह से देता है। पहला तो यह कि विभाग सीधे ग्राम पंचायत के खाते में धनराशि स्थानांतरित कर दे और प्रधान व सेक्रेटरी मिलकर लाभार्थियों के शौचालय बनवाएं। इसमेें दिक्कत यह है कि बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें कमीशनबाजी के चलते प्रधानों ने शौचालय बनवाने में ईंट, सीमेंट सहित अन्य निर्माण सामग्री बेहद घटिया और मानक से काफी कम लगाई है। इसके अलावा प्रधान और सेक्रेटरी की लापरवाही से बड़ी संख्या में शौचालय निर्माण भी अधूरे पड़े होने से उनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
दूसरी ओर अधिकारी इस रकम को सीधे लाभार्थी के खाते में भेजना नहीं चाह रहे हैं क्योंकि उन्हें इसमें संदेह है कि लाभार्थी कहीं रकम निकालकर अपनी दूसरी जरूरतों पर न खर्च कर डाले। ऐसे भी तमाम मामले हैं, जिसमें लाभार्थियों के खातों में पैसा जारी होने के बावजूद उन्होंने शौचालयों के निर्माण ही नहीं कराए हैं। खास बात यह है कि ऐसे एक भी मामले में प्रशासन लाभार्थियों से अब तक कोई वसूली भी नहीं कर सका है।
33 हजार टॉयलेट बनाने का लक्ष्य, 20 फीसदी भी नहीं बने
प्रशासन ने अप्रैल में एक करीब हजार गांवों में 33 हजार शौचालय बनवाने का विशेष अभियान चलाया था। इसके लिए जिला प्रशासन ने बड़ी संख्या में कर्मचारियों को जुटा दिया था। इसके बावजूद शौचालय के नाम पर लाभार्थियों के घरों में गड्ढे ही खुद सके हैं। इसमें लोगों के साथ जानवर भी गिर रहे हैं। करीब 80 शौचालयों के निर्माण न पूरे हो पाने से इस अभियान को तगड़ा झटका लगा है।
अब लाभार्थी के खाते में जाएगी रकम
ग्राम पंचायत निधि में भेजी गई धनराशि से शौचालय निर्माण की प्रगति अच्छी नहीं मिल सकी है। इसलिए अब शौचालय बनवाने के लिए लाभार्थियों के खाते में धनराशि भेजी जा रही है। इस संबंध में डीपीआरओ विनय कुमार सिंह ने रविवार को भी विकास भवन में पंचायत सचिवों के साथ बैठक कर कार्ययोजना तैयार की है। उनका दावा है कि गांवों में हर दिन बड़ी संख्या में शौचालयों के निर्माण हो रहे हैं।