बरेली। सुभाषनगर के जिस युवक के साथ नोएडा से आए कोरोना वायरस ने शहर में भयावह दस्तक दी थी, अब कोरोना को मात देने के बाद वही युवक और उसका परिवार दूसरे संक्रमितों की भी जान बचाने का जरिया बनेगा। युवक और उसके परिवार के लोगों का प्लाज्मा इन संक्रमितों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से संपर्क किए जाने के बाद इस परिवार ने सहमति जता दी है। जल्द युवक को लखनऊ ले जाकर केजीएमयू में उसका प्लाज्मा लिया जाएगा।
नोएडा की सीजफायर कंपनी में काम करने वाले युवक में 29 मार्च और उसके परिवार के पांच और लोगों के 31 मार्च को संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी और 17 अप्रैल तक एक-एक कर पूरा परिवार स्वस्थ होकर घर लौट गया। ये सभी लोग अब 10 दिन से ज्यादा समय से होम क्वारंटीन हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं। कोरोना के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम के मुताबिक तेजी से स्वस्थ होने के साथ अब पूरी तरह दुरुस्त होने से साफ जाहिर है कि इस परिवार के सदस्यों की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी बेहतर है। लिहाजा इस परिवार के लोगों का प्लाज्मा दूसरे संक्रमितों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
ईश्वर ने हम पर कृपा की, अब दूसरों
की मदद करने का सौभाग्य भी दिया
स्वास्थ्य विभाग की ओर से संपर्क किए जाते ही कोरोना को परास्त कर चुके सुभाषनगर के परिवार ने प्लाज्मा देने के लिए सहमति जता दी। अमर उजाला से बातचीत में परिवार के सदस्यों ने कहा कि वे लोग स्वस्थ होकर घर आ गए, यह ईश्वर की कृपा है और अब उनमें विकसित रोग प्रतिरोधक क्षमता के जरिए किसी और संक्रमित को भी कोरोना से लड़ने की शक्ति देगी, यह भी उनके लिए बेहद सौभाग्य की बात है। परिवार के लोगों ने कहा कि ईश्वर का दिया हुआ नया जीवन ईश्वर के लिए ही समर्पित है। स्वास्थ्य विभाग उनके परिवार के किसी भी सदस्य का प्लाज्मा ले, उन्हें कोई दिक्कत नहीं है।
एंटीबॉडी यानी इंसान को कुदरत
की दी हुई सबसे बड़ी शक्ति
एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम के मुताबिक इस थेरपी में सीधे तौर पर एंटीबॉडी का इस्तेमाल किया जाता है। दरअसल किसी वायरस या बैक्टीरिया के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी तभी बनता है, जब इंसान उससे पीड़ित होता है। कोरोना संक्रमण के बाद लोगों के स्वस्थ होने में दवा और इलाज से भी ज्यादा एंटीबॉडी का ही योगदान है। कोरोना के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी बनती है और फिर वायरस से लड़ती है। कोई कोरोना संक्रमित तभी गंभीर होता है जब उसके शरीर में तुरंत एंटीबॉडी नहीं बनती है। ऐसे मरीजों के लिए ही प्लाज्मा थेरेपी अब तक कारगर साबित हुई है। स्वस्थ हुए लोगों के खून से प्लाज्मा लेकर उसकी मदद से एक से दो तक संक्रमितों को ठीक किया जा सकता है।
कोरोना संक्रमण की दूसरी स्टेज पर
इस्तेमाल होती है प्लाज्मा थेरपी
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सुदीप सरन ने बताया कि कोरोना वायरस की तीन स्टेज हैं। पहली स्टेज में वायरस शरीर में जाता है, दूसरी में फेफड़ों तक पहुंचता है और तीसरे में शरीर उससे लड़ने और उसे मारने की कोशिश करता है जो सबसे खतरनाक स्टेज होती है जहां शरीर के अंग तक खराब हो जाते हैं। प्लाज्मा थेरेपी के लिए सबसे सही वक्त दूसरी स्टेज का होता है क्योंकि पहली में इसे देने का फायदा नहीं और तीसरी में यह कारगर नहीं रहेगा। प्लाज्मा थेरपी ही मरीज को तीसरी स्टेज तक जाने से रोक सकती है। उन्होंने बताया कि प्लाज्मा देना रक्त देने जैसा नहीं है। दोबारा प्लाज्मा देने के लिए तीन महीने का इंतजार जरूरी नहीं है। इच्छा हो तो दस दिन बाद भी दोबारा प्लाज्मा दे सकते हैं। प्लाज्मा थेरेपी बाकी इलाजों से कम खर्चीली भी है।