बरेली। कोरोना काल में जहां संक्रमण के डर के बीच स्कूल बंद हैं, वहीं भोजीपुरा के पास पिपरिया गांव की रहने वाली कक्षा नौ की छात्रा लक्ष्मी के घर में सरस्वती की बयार चल रही है। लॉकडाउन के बाद से ही लक्ष्मी अपने किराए के घर के आंगन में गांव के कुछ बच्चों को बुलाकर बोर्ड पर अक्षरज्ञान दे रही है। लक्ष्मी का कहना है कि मेहनत मजदूरी करने वाले परिवार के लोग खुश नहीं थे लेकिन उसे पढ़ाना बहुत पसंद है।
दरअसल, कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के कारण शहर से लेकर गांव तक सभी स्कूल बंद हैं। स्कूलों के बंद रहने और शिक्षकों के न आ पाने से गांव के बच्चोें की पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो गई थी। सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई भले ही शुरू कराई गई हो लेकिन गरीब बच्चों के पास मोबाइल न होने से उनके लिए ऑनलाइन शिक्षा ले पाना संभव नहीं हो पा रहा है।
बच्चों की इस दिक्कत को भोजीपुरा के भारत इंटर कॉलेज में कक्षा नौ की छात्रा जब लक्ष्मी को महसूस हुई तो उसे रहा न गया और उसने अपने किराए के मकान में ही पढ़ाई से दूर हो रहे बच्चों की मदद करने का फैसला लिया। लक्ष्मी कहती है कि उनके पिता सुखलाल ड्राइवर थे लेकिन पैर टूट जाने के बाद से काफी समय से घर पर ही रह रहे हैं। मां विमला देवी और भाई गुड्डू किसी तरह से मेहनत मजदूरी करके परिवार की गाड़ी खींच रहे हैं।
कोरोना काल के संघर्ष के दिनों में जब लक्ष्मी ने गांव के बच्चों को घर पर बुलाकर मुफ्त में पढ़ाना शुरू किया तो शुरूआत में घर वाले इससे खुश नहीं थे लेकिन लक्ष्मी तय कर चुकी थी कि उसे हर हाल में गांव के बच्चों को किताबोें से दूर नहीं करना है। उसकी मेहनत रंग लाई और कई महीने से घर के आंगन में लक्ष्मी की पाठशाला में बच्चे ककहरा सीख रहे हैं। दोपहर 12 बजे दो बजे के बीच लगने वाली यह पाठशाला समूचे गांव में चर्चा का विषय बनी हुई है। लक्ष्मी का कहना है कि हर दिन 15 से 20 बच्चे बस्ता लेकर आते हैं। गांव के एक सरकारी स्कूल की टीचर लक्ष्मी को मोबाइल पर बच्चों का होमवर्क भेज देती हैं। जिसे वह पूरा मन लगाकर बच्चों के काम को पूरा कराती है।
जब तक स्कूल नहीं खुलते..लगती रहेगी लक्ष्मी की पाठशाला
लक्ष्मी का कहना है कि लॉकडाउन के बाद से स्कूल बंद है। जब तक कोरोना का खतरा खत्म नहीं हो जाता और स्कूल दोबारा नहीं खुल जाती, उसकी घर में लगने वाली पाठशाला यूं ही चलती रहेगी। छोटी सी उम्र में लक्ष्मी के इस बड़े हौसले को देखकर गांव के सभी लोग उसकी प्रशंसा और चर्चा कर रहे हैं।
लक्ष्मी की मदद के लिए बढ़ रहे हाथ
लक्ष्मी का कहना है कि पाठशाला लगाने का मन बना लिया था। इसके बाद वह छोटे से बोर्ड और सादा मोबाइल के जरिए हर रोज चार घंटे बच्चों को अपनी पाठशाला में पढ़ाने लगी। गरीब परिवार की बेटी लक्ष्मी ने अपने पैसों से बच्चों को जरूरी चीजें भी दी और उनके बैठने के लिए कट्टों का इंतजाम किया। जब लक्ष्मी की पाठशाला के बारे में सुना तो संजीव जिंदल उर्फ साइकिल बाबा वहां पहुंच गए। उन्होंने 29 अक्टूबर को लक्ष्मी की पाठशाला को फेसबुक पर लाइव दिखाया तथा लोगों से लक्ष्मी की सहायता करने की अपील की। इसके बाद एक संस्था ने बच्चों को पढ़ाने के लिए एक नया मोबाइल दिया। धीरे-धीरे लक्ष्मी की मदद के लिए कई और लोगों के हाथ आगे बढ़ रहे हैं।