बरेली। संतोष शर्मा हत्याकांड में गिरफ्तार सभी आरोपियों की स्थानीय अदालत से हुई जमानत के पीछे लचर विवेचना बताई जा रही है। संतोष के भाई राजेश शर्मा ने विवेचक की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। कहा है कि पहले दिन से ही केस खराब करने का काम किया गया। वह हाईकोर्ट जाकर सीबीआई से विवेचना कराने की मांग करेंगे।
हाल ही में संतोष शर्मा की हत्या में नामजद छह पुलिसकर्मियों ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। बुधवार को स्थानीय कोर्ट ने इन्हें जमानत दे दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कई ऐसे सवाल उठाए जहां वादी पक्ष उचित स्पष्टीकरण नहीं दे सका था। बृहस्पतिवार को संतोष के भाई राजेश शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि विवेचक फतेहगंज पश्चिमी थाना प्रभारी की भूमिका इस मामले में शुरू से गड़बड़ रही है। वह कभी निजी डॉक्टर की रिपोर्ट तो कभी दूसरे तरीकों से केस को कमजोर करने में जुटे रहे। इसके विरोध में उनका परिवार लगातार आवाज भी उठाता रहा पर स्थानीय अधिकारियों ने सुनवाई ही नहीं की। पूरा जोर हत्या के मामले को गैर इरादतन हत्या जैसी स्थिति में लाने पर रहा। उन्हें भरोसा नहीं है। वह हाईकोर्ट जा रहे हैं। वहां सीबीआई जांच की मांग करेंगे ताकि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो सके।
ये हुआ था घटनाक्रम
आठ नवंबर 2023 को भमोरा थाने के गांव सरदार नगर निवासी संतोष शर्मा की पुलिस ने घेरकर पिटाई कर दी थी। पुलिस एक निजी एंबुलेंस से चालक विजय को लेकर दिवाली पर जुआ पकड़ने गई थी। जुआरियों के फरार होने पर गुस्साई पुलिस ने वहां से गुजर रहे संतोष शर्मा को पकड़कर पूछताछ की थी। संतोष ने भलाई बुराई के डर से इन लोगों के नाम पते बताने से इन्कार किया तो पुलिस ने उन्हें बेरहमी से पीटा था। दो दिन इलाज के बाद संतोष शर्मा की मौत हो गई थी। उस वक्त भीड़ के गुस्से को देखकर पुलिस ने सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। कुछ और पुलिसकर्मियों के नाम प्रकाश में आए थे और करीब दस लोगों को एसएसपी ने निलंबित किया था।
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वर्जन
- संतोष शर्मा की हत्या के मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर कोई शिकायत है तो पीड़ित पक्ष आकर बता सकता है। जो भी संभव कार्रवाई होगी, वह की जाएगी। - मानुष पारीक, एसपी दक्षिणी