एसएसडीए अभी जांच के लिए नमूने लखनऊ या दूसरी शहरों में भेजता है। लैब की संख्या कम होने और विभागीय अधिकारियों के पैरवी न करने के प्रयोगशाला में नमूनों महीनों पड़े रहते हैं और उनकी जांच नहीं होती। इस समस्या से निपटने के लिए मंडल मुख्यालय में 2500 वर्गमीटर पर खाद्य प्रयोगशाला शुरू को झंडी मिल गई है। सीएम के आदेश है कि यह प्रयोगशाला छह माह में बनकर तैयार हो जाए।
अभी खाद्य नमूनों की जांच के लिए नमूनों को भेजने और उसकी जांच के वापस आने में काफी समय लगता है। तीन से छह माह से भी ज्यादा समय गुजरने के बाद भी जांच रिपोर्ट न मिलने से मिलावटखोरों पर जल्द कार्रवाई नहीं हो पा रही है। अब सभी सुविधाओं से लैस खाद्य प्रयोगशाला का निर्माण मंडल मुख्यालय पर होना है। इस लैब में प्रभारी प्रयोगशाला कक्ष, कार्यालय, नमूना प्राप्ति कक्ष, कोडिंग रूम, नमूना स्टोरेज रूम, संयंत्र कक्ष, रासायनिक प्रयोगशाला, विश्राम कक्ष, हाट कक्ष, अभिलेख कक्ष, स्टोर और प्रसाधन भी बनने हैं। सीएम के आदेश हैं कि ये प्रयोगशाला जल्द से जल्द काम करना शुरू कर दे, इसलिए 25 सौ वर्गमीटर जगह वाले सरकारी बिल्डिंग की तलाश कर ली जाए। अगर ऐसा नहीं हो पा रहा है कि तो अगस्त में ही किराये के भवन लेने के लिए शासन को अवगत करा दिया जाए।
सिटी मजिस्ट्रेट ने मांगा पेंडिंग सैंपल का ब्योरा
हाल में एक रिफाइंड का नमूना लखनऊ के बाद कोलकाता लैब में भेजा गया था। इन दोनों ही लैब ने इस नमूने को फेल कर दिया था। जबकि ये नमूने होली के समय लिए गए थे। यह मामला सामने आने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने एफएसडीए के अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्रा से यह रिपोर्ट मांगी है कि विभागीय टीम ने कब-कब कितने नमूने भेजे हैं। उसमें से कितनों की जांच रिपोर्ट आई है और कितने लंबित हैं।